पौड़ी गढ़वाल : हिमालय की गोद में बसे पौड़ी और पर्यटन नगरी खिर्सू के मनमोहक नजारे जल्द ही बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर दर्शकों को लुभाएंगे। यहां इन दिनों हिंदी फिल्म ‘आओगे जब तुम’ की शूटिंग जोर-शोर से चल रही है, और इसकी 80 प्रतिशत शूटिंग पूरी हो चुकी है। यह पहला ऐसा अवसर है जब किसी हिंदी फिल्म की आधी से ज्यादा शूटिंग पौड़ी और उसके आसपास के इलाकों में हो रही है। फिल्म के दिसंबर में रिलीज होने की उम्मीद है, जो न केवल मनोरंजन की दुनिया में एक नई कहानी जोड़ेगी, बल्कि पौड़ी और खिर्सू को पर्यटन के मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाएगी। स्थानीय निवासियों और पर्यटन व्यवसायियों में इस फिल्म को लेकर उत्साह की लहर दौड़ रही है, क्योंकि यह उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया तक पहुंचाने का एक सुनहरा माध्यम बनेगी।
‘आओगे जब तुम’ एक रोमांटिक प्रेम कहानी है, जो संगीत की मधुर धुनों से सजी हुई है। फिल्म की कहानी पहाड़ों की वादियों में बुनी गई है, जहां प्यार की मिठास और प्रकृति की खूबसूरती एक-दूसरे से जुड़कर एक जादुई दुनिया रचती है। निर्देशक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि फिल्म की टीम ने देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और लोकेशन चयन के बाद पौड़ी और खिर्सू को चुना गया। “पौड़ी का प्राकृतिक सौंदर्य अनुपम है। यहां की हरियाली, पहाड़ियां और शांत वातावरण फिल्म की कहानी के अनुरूप बिल्कुल फिट बैठते हैं,” उन्होंने कहा। मुख्य सहायक निर्देशक अमन शुक्ला और अंकित सिंह ने भी इस बात पर जोर दिया कि फिल्म का हर पक्ष – कलाकार, संगीत, साज-सज्जा, कैमरा और लाइटिंग – मजबूती, ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से काम कर रहा है। दिन-रात की कड़ी मेहनत से टीम जल्द ही शूटिंग पूरी करने की दिशा में बढ़ रही है।
पौड़ी में शूटिंग के दौरान शहरवासी भी उत्साहित होकर लोकेशन पर पहुंच रहे हैं। वे कलाकारों को देखकर खुशी से झूम उठते हैं और सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। वैसे तो पौड़ी में पहले भी कई संगीत एलबम, वेब सीरीज और फिल्मों की शूटिंग हुई है, लेकिन किसी हिंदी फीचर फिल्म की 80 प्रतिशत शूटिंग यहां होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है, क्योंकि इससे राज्य की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। फिल्म की टीम ने पौड़ी बस अड्डा, गढ़वाल विश्वविद्यालय के बीजीआर परिसर, कंडोलिया थीम पार्क, क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर परिसर और संस्कृति भवन प्रेक्षागृह जैसी जगहों पर शूटिंग की है। साथ ही खिर्सू के विभिन्न स्थानों पर भी दृश्य फिल्माए गए हैं, जबकि कुछ हिस्सा देहरादून में शूट किया जाएगा। इन लोकेशनों की खूबसूरती बड़े पर्दे पर देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाएंगे।
फिल्म की कास्ट भी दमदार है, जो इसे और आकर्षक बनाती है। मुख्य भूमिका में ओमकार कपूर हैं, जो ‘प्यार का पंचनामा-टू’ और ‘उफ्फ ये सियापा’ जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके साथ प्रतिष्ठित अभिनेता राकेश बेदी, नीलू कोहली और अतुल श्रीवास्तव जैसे दिग्गज कलाकार हैं, जिन्होंने कई सफल फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी है। राकेश बेदी हाल ही में पौड़ी पहुंचे और उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर देवप्रयाग की तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “देवप्रयाग पहुंचकर गदगद हूं। यह दूसरा मौका है जब मैं यहां आया हूं। पौड़ी के नजारे अद्भुत, अलौकिक और अप्रतिम हैं।” उनकी यह पोस्ट वायरल हो रही है और लोगों में फिल्म के प्रति उत्सुकता बढ़ा रही है। अभिनेत्री प्रगति चौहान और आयुष उनियाल नवोदित कलाकार हैं, जो अपनी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीतने को तैयार हैं।
फिल्म के निर्माता शिखर पिक्चर से अतुल गुप्ता हैं, जबकि कथा और पटकथा पुष्पेंद्र सिंह ने लिखी है। संवाद आशीष सूर्यभान द्विवेदी ने तैयार किए हैं और संगीत पार्थ सखा दास कवि का है। निर्देशक ने स्थानीय कलाकारों को भी मौका दिया है, जिसमें सोनू, शिवम और अरमान जैसे युवा शामिल हैं। ये कलाकार फिल्म का हिस्सा बनकर बेहद उत्साहित हैं। सोनू ने कहा, “बॉलीवुड फिल्म में काम करना सपने जैसा है। इससे हमें अपनी प्रतिभा दिखाने का प्लेटफॉर्म मिला है और पौड़ी की खूबसूरती को दुनिया देखेगी।” यह कदम स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देता है और उत्तराखंड के युवाओं में फिल्म इंडस्ट्री के प्रति रुचि बढ़ाता है।
इस फिल्म से पौड़ी और खिर्सू में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मुख्य सहायक निर्देशक अमन शुक्ला ने कहा, “फिल्म में इन इलाकों के अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाने का उद्देश्य यही है कि इन्हें देश के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाया जाए।” वाकई, उत्तराखंड पहले से ही पर्यटन के लिए मशहूर है, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों के जरिए इसकी लोकप्रियता और बढ़ती है। याद कीजिए, ‘केदारनाथ’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ जैसी फिल्मों ने राज्य के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। अब ‘आओगे जब तुम’ भी वैसा ही जादू कर सकती है। स्थानीय होटल व्यवसायी और गाइड्स का मानना है कि फिल्म रिलीज होने के बाद पर्यटकों की संख्या में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। खिर्सू, जो अपनी हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, अब और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।
फिल्म की टीम पौड़ी में मिले आतिथ्य सत्कार से अभिभूत है। निर्देशक पुष्पेंद्र सिंह ने कहा, “पूरी यूनिट की यहां खूब आवभगत हो रही है। पालिकाध्यक्ष हिमानी नेगी, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया और नवांकुर नाट्य समूह का विशेष आभार।” यह सहयोग उत्तराखंड की मेहमाननवाजी की मिसाल है, जो फिल्म इंडस्ट्री को राज्य की ओर आकर्षित करता है। सरकार भी ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित कर रही है। हाल ही में उत्तराखंड फिल्म नीति के तहत शूटिंग के लिए सब्सिडी और सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे राज्य में फिल्म निर्माण बढ़ रहा है। इससे न केवल रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
‘आओगे जब तुम’ न केवल एक फिल्म है, बल्कि उत्तराखंड की ग्रोथ स्टोरी का एक हिस्सा है। यह दिखाती है कि कैसे प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को मनोरंजन के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। फिल्म की रिलीज से पौड़ी और खिर्सू के युवाओं में नई ऊर्जा आएगी, पर्यटन बढ़ेगा और राज्य का विकास तेज होगा। जैसा कि राकेश बेदी ने कहा, “यहां की सुंदरता अलौकिक है।” उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उत्तराखंड की एक अमिट छाप छोड़ेगी और अधिक से अधिक लोग यहां की वादियों में खोने आएंगे।
फिल्म की टीम का कहना है कि शूटिंग के दौरान कोई बड़ी चुनौती नहीं आई, क्योंकि स्थानीय प्रशासन और निवासियों का पूरा सहयोग मिला। मौसम की अनिश्चितता को भी सकारात्मक तरीके से संभाला गया, जो फिल्म की नेचुरल लाइटिंग को और बेहतर बनाती है। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। दिसंबर में रिलीज होने पर दर्शक न केवल एक रोमांटिक कहानी देखेंगे, बल्कि पौड़ी-खिर्सू की जादुई दुनिया में खो जाएंगे। यह फिल्म साबित करेगी कि पहाड़ों की सुंदरता किसी भी कहानी को और जीवंत बना सकती है।
उत्तराखंड सरकार भी ऐसे प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रही है। हाल के वर्षों में राज्य में कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल आयोजित हो चुके हैं, जो फिल्ममेकर्स को आकर्षित कर रहे हैं। ‘आओगे जब तुम’ जैसी फिल्में न केवल मनोरंजन प्रदान करती हैं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती हैं। स्थानीय कलाकारों का शामिल होना युवाओं को प्रेरित करता है कि वे अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर ले जा सकते हैं। फिल्म इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में शूटिंग की लागत कम है और सुंदरता अधिक, इसलिए आने वाले समय में यहां और फिल्में आएंगी।

