पिथौरागढ़: सीमांत जिले पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका हुआ है, जिसके कारण यहां पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को बिना जांच के ही घर लौटना पड़ रहा है। यह समस्या केवल स्थानीय महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल और चंपावत से आने वाली महिलाएं भी प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में तैनात एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, रेडियोलॉजिस्ट के ड्यूटी पर लौटने के बाद ही सुविधा बहाल हो सकेगी।
यह घटना उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की एक झलक है। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के लिए हफ्ते में दो दिन—बुधवार और शुक्रवार—अल्ट्रासाउंड शिविर लगाया जाता है। लेकिन रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में ये शिविर भी रद्द हो रहे हैं। कई महिलाएं दूर-दराज के इलाकों से उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। एक गर्भवती महिला ने बताया, “मैं नेपाल सीमा से आई हूं, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। अब प्राइवेट क्लिनिक में जाना पड़ेगा, जो महंगा है।” अस्पताल के फिजिशियन कक्ष में भी मरीजों की भीड़ लगी हुई है। बुखार, जुकाम, खांसी और पेट दर्द से पीड़ित रोगी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में भी यही हाल है।
डॉ. भागीरथी गर्याल, पीएमएस जिला अस्पताल पिथौरागढ़ ने कहा, “रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर हैं। उनके वापस ड्यूटी पर लौटने पर सुविधा सुचारू हो जाएगी।” लेकिन यह समस्या नई नहीं है। पिथौरागढ़ जिले की आबादी 4.83 लाख से अधिक है, और यहां केवल एक रेडियोलॉजिस्ट तैनात है। गर्भवती महिलाओं से लेकर सामान्य रोगियों तक के अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी इसी एक व्यक्ति पर है। स्थानीय निवासी लंबे समय से स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। यदि एक अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होती, तो ऐसी परेशानियां नहीं होतीं।

