Sunday, February 8, 2026
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आखिरकार परेड ग्राउंड हुआ अब नगर निगम के हवाले

NTI: राजधानी दून का ऐतिहासिक परेड ग्राउंड आखिरकार नगर निगम को ट्रांसफर हो ही गया है। दरअसल, हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी। पहले परेड ग्राउंड को एमडीडीए को भी सौंपने की बात हुई थी। लेकिन, इस पर सहमति नहीं बन पाई। नगर निगम भी टेक ओवर करने पर सहमत नहीं था। लंबे विचार विमर्श व मंथन के बाद तमाम सुविधाओं से लैस परेड ग्राउंड को नगर निगम प्रशासन के हवाले कर दिया गया। स्मार्ट सिटी की ओर से परेड ग्राउंड को स्मार्ट बनाने के बाद इसे नगर निगम के सुपुर्द कर दिया गया है। अब परेड ग्राउंड में होने वाली गतिविधियों से लेकर इसके ऑपरेशन व मेंटेनेंस तक की पूरी देखरेख नगर निगम करेगा। बताया जा रहा है कि नगर निगम ने परेड ग्राउंड को टेकओवर कर लिया है।

कई सुविधाओं से लैस है परेड ग्राउंड
पिछले कई दिनों से चर्चाएं जोरों पर थीं कि शहर के बीचोंबीच स्थित जिस परेड ग्राउंड का स्मार्ट सिटी ने करोड़ों की लागत से ब्यूटीफिकेशन किया है। अब वह नगर निगम को ट्रांसफर हो जाएगा। इस बावत कई दौर नगर निगम व स्मार्ट सिटी परेड ग्राउंड का निरीक्षण कर चुके हैं। हाल ही में दोनों विभागों की टीम ने निरीक्षण किया। स्मार्ट सिटी ने 15 अगस्त तक ग्राउंड को हैंडओवर लेने की बात कही थी, लेकिन नगर निगम ने ग्राउंड में होने वाले 15 अगस्त के जलसे के बाद हैंडओवर पर अड़ा रहा। 15 अगस्त के बाद स्मार्ट सिटी व नगर निगम की टीम की ओर से किए गए संयुक्त निरीक्षण के बाद आखिरकार वर्षों से चल रही हस्तांतरण की कार्रवाई को पूरा किया गया।

परेड ग्राउंड को स्मार्ट बनाने में हुए 20 खर्च
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत परेड ग्राउंड का ब्यूटीफिकेशन किया गया। जिस पर करीब 20 करोड़ से ज्यादा का खर्च किया गया। हालांकि, कुछ वर्षों पहले परेड ग्राउंड को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण यानि एमडीडीए को ट्रांसफर किए जाने भी बात उठी थी। लेकिन, एमडीडीए ने परेड ग्राउंड को लेने से मना कर दिया। नगर निगम को भी परेड ग्राउंड हस्तांतरित ए जाने की लंबे समय से चर्चा चल रही है, लेकिन, कई मुददों पर स्मार्ट सिटी की नगर निगम से सहमति नहीं बन पा रही थी। नगर निगम ने साफ किया था कि परेड ग्राउंड में जितने भी काम हुए हैं, वे सही हालत में ही नगर निगम के सुपुर्द किए जाएं।

मेंटेनेंस कार्य पूरे
स्मार्ट सिटी का मेंटनेंस काफी खर्चीला है। इस ग्राउंड के डेवलपमेंट पर तकरीबन बीस करोड़ से अधिक खर्च हुए हैं। ऐेसे में नगर निगम भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था। निगम ने स्मार्ट सिटी को ग्राउंड के सभी कार्यों की मेंटेनेंस के कार्य पूरे करने के बाद ही हस्तांतरण की कार्रवाई पूरी करने की बात कही। इसके बाद स्मार्ट ने लगभग सभी कार्यों की रिपेयरिंग का काम पूरा किया गया। अगस्त के आखिरी सप्ताह स्मार्ट सिटी और नगर निगम के बीच ट्रांसफर की कार्रवाई संपन्न हुई।

परेड ग्राउंड का इतिहास
राजधानी दून का परेड ग्राउंड भले ही अब बदल गया हो। लेकिन, बताया जा रहा है कि आजादी से पहले यहां ब्रिटिश सेना की परेड हुआ करती थी। तभी मैदान का नाम परेड ग्राउंड पड़ा। जब देश आजाद हुआ तो 15 अगस्त 1947 को यहां जश्न-ए-आजादी मनाया गया। आजादी के बाद परेड ग्राउंड सांस्कृतिक व सामूहिक आयोजनों का मुख्य स्थल बन गया।

एक नजर में परेड ग्राउंड
9 नवंबर 1981 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में अनु सचिव सत्य कुमार वर्मा ने डीएम दून को पत्र लिखा था कि पूर्र्वी परेड ग्राउंड पर स्टेडियम, बहुद्देशीय हॉल व स्विमिंग पूल के लिए ग्राउंड को खेल विभाग को ट्रांसफर किया जाए। 7 अप्रैल 1989 को तत्कालीन यूपी गवर्नमेंट में परेड ग्राउंड को निशुल्क खेल विभाग को ट्रांसफर करने के लिए पत्र लिखा गया था।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत परेड ग्राउंड को स्मार्ट बनाया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करके ग्राउंड को स्मार्ट बनाया गया है। तमाम सुविधाओं से लैस इस ग्राउंड को नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया गया है। अब इस ग्राउंड का मेंटेनेंस व ऑपरेशन नगर निगम की ओर से किया जाएगा।
तीरथ पाल, एसीईओ, स्मार्ट सिटी

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