NTI: भारत सरकार ने देश के ग्रामीण विकास को एक नई दिशा देने के लिए पहली बार पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) जारी किया है। इस इंडेक्स में देश भर की 2.16 लाख पंचायतों को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) यानी सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों के आधार पर रैंकिंग दी गई है। पंचायतों के स्तर पर इस तरह का इंडेक्स भारत में पहली बार तैयार किया गया है, जिसके कारण यह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस इंडेक्स को पंचायती राज मंत्रालय ने तैयार किया है, जो ग्रामीण भारत के विकास और स्थानीय शासन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
नौ थीम्स और स्कोरिंग
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स में पंचायतों का मूल्यांकन सतत विकास लक्ष्यों की नौ प्रमुख थीम्स के आधार पर किया गया है। इन थीम्स में गरीबी उन्मूलन, भूखमरी खत्म करना, स्वास्थ्य और कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल और स्वच्छता, किफायती और स्वच्छ ऊर्जा, सम्मानजनक काम और आर्थिक विकास, और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन नौ थीम्स के तहत पंचायतों को उनके प्रदर्शन के आधार पर 0 से 100 के स्केल पर स्कोर दिया गया है।
स्कोर के आधार पर पंचायतों को पांच श्रेणियों में बांटा गया है:
- अचीवर (Achiever): 90 से 100 स्कोर वाली पंचायतें।
- फ्रंट रनर (Front Runner): 75 से 90 स्कोर वाली पंचायतें।
- परफॉर्मर (Performer): 60 से 75 स्कोर वाली पंचायतें।
- एस्पिरेंट (Aspirant): 40 से 60 स्कोर वाली पंचायतें।
- बिगिनर (Beginner): 40 से कम स्कोर वाली पंचायतें।
इंडेक्स के नतीजे: 699 पंचायतें फ्रंट रनर
इस इंडेक्स में देश भर की 2.16 लाख पंचायतों का विश्लेषण किया गया, जिसमें से केवल 699 पंचायतों को फ्रंट रनर श्रेणी में जगह मिली है, यानी इनका स्कोर 75 से 90 के बीच रहा। यह आंकड़ा बताता है कि अभी भी बड़ी संख्या में पंचायतों को अपने प्रदर्शन में सुधार की जरूरत है। हालांकि, यह भी उल्लेखनीय है कि कोई भी पंचायत “अचीवर” श्रेणी में नहीं पहुंच पाई, जिसका स्कोर 90 से ऊपर हो। वहीं, 35.8% पंचायतों को परफॉर्मर (60-75 स्कोर) और 61.2% को एस्पिरेंट (40-60 स्कोर) श्रेणी में रखा गया है। इससे साफ है कि ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह इंडेक्स?
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स का जारी होना इसलिए खास है क्योंकि यह पहली बार पंचायतों के स्तर पर उनके प्रदर्शन को मापने और तुलना करने का एक व्यवस्थित तरीका पेश करता है। यह इंडेक्स न केवल पंचायतों की कमियों को उजागर करता है, बल्कि उनके बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने का भी रास्ता दिखाता है। सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए यह इंडेक्स एक आधारभूत रिपोर्ट के रूप में काम करेगा, जिससे नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
पंचायती राज मंत्रालय की भूमिका
पंचायती राज मंत्रालय ने इस इंडेक्स को तैयार करने के लिए व्यापक डेटा संग्रह और विश्लेषण किया है। मंत्रालय ने 435 अद्वितीय स्थानीय संकेतकों का उपयोग किया, जिसमें से 331 अनिवार्य और 104 वैकल्पिक हैं। ये संकेतक सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय संकेतक ढांचे (NIF) के साथ संरेखित हैं। इससे इंडेक्स की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
यह इंडेक्स न सिर्फ पंचायतों के मौजूदा प्रदर्शन का आकलन करता है, बल्कि भविष्य के लिए एक रोडमैप भी तैयार करता है। जिन पंचायतों को बिगिनर और एस्पिरेंट श्रेणी में रखा गया है, उनके लिए यह एक प्रेरणा है कि वे अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग करें और सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाएं। वहीं, फ्रंट रनर पंचायतें अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।
भारत सरकार का यह प्रयास ग्रामीण विकास को साक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स के जरिए न केवल पंचायतों की जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण भारत में जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में भी ठोस प्रगति होगी। यह इंडेक्स भविष्य में पंचायतों के विकास की कहानी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा करता है।

