Sunday, February 8, 2026
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कुमाऊं के स्कूलों में शिक्षकों के 5,000 से अधिक पद खाली

नैनीताल: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। मंडल के सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। कई स्कूल तो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि क्लस्टर स्कूल प्रणाली को लेकर बहस चल रही है, सरकारी स्कूलों की यह जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है।

कुमाऊं मंडल के सभी छह जिलों में एलटी (प्रशिक्षित स्नातक) और प्रवक्ता (व्याख्याता) संवर्ग के 5,000 से अधिक पद खाली हैं। हर साल बड़ी संख्या में शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, लेकिन रिक्त पदों को भरने में शिक्षा निदेशालय सफल नहीं हो पाया है। इससे लगातार शिक्षकों की संख्या घटती जा रही है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।

उठते सवाल: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के पास निजी स्कूलों में जाने या ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने जैसे विकल्प और संसाधन नहीं होते। ऐसे में सरकारी स्कूल ही उनका एकमात्र सहारा हैं। शिक्षकों की कमी के कारण इन बच्चों की पढ़ाई और भविष्य दोनों ही अधर में लटके हुए हैं। छात्रों की कम संख्या, शिक्षकों की अनुपलब्धता और अभिभावकों की निराशा, ये कारक मिलकर कई सरकारी स्कूलों को बंद होने के कगार पर खड़ा कर चुके हैं। यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत देती है कि इन सरकारी स्कूलों में देश का भविष्य कैसे संवर रहा होगा।

जिलेवार रिक्त पदों की संख्या:

  • नैनीताल: 480
  • अल्मोड़ा: 1158
  • बागेश्वर: 545
  • पिथौरागढ़: 1250
  • चंपावत: 190
  • ऊधमसिंह नगर: 1418
  • कुल रिक्त पद: 5041

कुमाऊं मंडल के एडी माध्यमिक, गजेंद्र सिंह सौन ने बताया कि एलटी शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर और प्रवक्ताओं की प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य पदों पर पदोन्नति का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी बताया कि लोक सेवा आयोग द्वारा नियुक्तियों के लिए परीक्षा कराई जानी है, जिसके बाद शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना होगा कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होती है और कब तक कुमाऊं के स्कूलों को पर्याप्त शिक्षक मिल पाते हैं।

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