Thursday, April 2, 2026
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देहरादून में पेड़ों के चारों ओर लगे कंक्रीट जल्दी हटाओ- NGT

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने देहरादून शहर में पेड़ों के तनों के आसपास हो रहे व्यापक कंक्रीटीकरण पर ब्रेक लगाते हुए वन विभाग और शहरी स्थानीय निकायों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है।

देहरादून: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने देहरादून शहर में पेड़ों के तनों के आसपास हो रहे व्यापक कंक्रीटीकरण पर ब्रेक लगाते हुए वन विभाग और शहरी स्थानीय निकायों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि पेड़ों की जड़ों तक पानी पहुंचने में बाधा डालने वाली अभेद्य सामग्री को हटाने के लिए शिकायतों का चार सप्ताह के अंदर समाधान किया जाए।

NGT की खंडपीठ ने देहरादून में वृक्ष संरक्षण नियमों के उल्लंघन पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने पेड़ों के अस्तित्व को बचाने के लिए सख्त रुख अपनाया। याचिका में फोटोग्राफिक सबूत और जियो-कोऑर्डिनेट्स के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में नॉन-परवियस टाइल्स और कंक्रीट की परत बिछाए जाने का दस्तावेजीकरण किया गया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट और impermeable सामग्री लगने से पानी जड़ों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे पेड़ों का विकास रुक जाता है और वे सूखने लगते हैं। इससे पहले भी ऐसी कई शिकायतें दर्ज की गई थीं। 8 मई 2025 को पिछली याचिकाओं को वापस लिया गया था, लेकिन 28 मई को दिए गए प्रतिनिधित्व पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस लापरवाही के चलते NGT को दोबारा हस्तक्षेप करना पड़ा।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में आदित्य एन. प्रसाद बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया। उस फैसले में साफ निर्देश दिया गया था कि पेड़ों के तनों के कम से कम एक मीटर के दायरे में कंक्रीट हटा दिया जाए। NGT ने अपनी प्रधान पीठ के दो अन्य फैसलों का भी जिक्र किया, जिसमें अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण के इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा गया था।

NGT ने तय की सख्त रूपरेखा

ट्रिब्यूनल ने मामले का निपटारा करते हुए कार्रवाई की स्पष्ट समयरेखा तय कर दी है:

  • याचिकाकर्ता अब संभागीय वन अधिकारी (DFO) और संबंधित शहरी स्थानीय निकाय के प्रमुख को नया प्रतिनिधित्व दे सकेंगे।
  • इस प्रतिनिधित्व के साथ पेड़ों की मौजूदा स्थिति की तस्वीरें जरूर संलग्न करनी होंगी।
  • प्रतिनिधित्व मिलने के बाद अधिकारियों को पेड़ों की स्थिति जांचनी होगी और चार सप्ताह के अंदर उचित कार्रवाई पूरी करनी होगी।
  • DFO और शहरी निकाय प्रमुख को अपनी कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को सौंपनी होगी।

पीठ ने चेतावनी दी कि इन निर्देशों का पालन न करने पर ट्रिब्यूनल मामले को गंभीरता से लेगा और आगे की सुनवाई कर सकता है।

देहरादून में पिछले कुछ वर्षों में तेज शहरी विकास के चलते सड़कों, फुटपाथों और पार्कों में पेड़ों के चारों ओर टाइल्स और कंक्रीट बिछाने का सिलसिला बढ़ा है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे शहर की हरियाली तेजी से घट रही है। पेड़ों की जड़ें ऑक्सीजन और पानी की कमी से कमजोर हो रही हैं, जो समग्र पर्यावरण संतुलन को प्रभावित कर रहा है।

NGT का यह आदेश उत्तराखंड की राजधानी में वृक्ष संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर कंक्रीट हटाया गया तो मौजूदा पेड़ों को बचाया जा सकेगा और नई पौधों की वृद्धि भी बेहतर होगी।

वन विभाग और नगर निगम अब इस आदेश पर अमल करने की तैयारी में हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएं।

यह फैसला उन सभी शहरों के लिए मिसाल बन सकता है जहां अनियोजित कंक्रीटीकरण से पेड़ों को खतरा है। NGT ने साफ संदेश दिया है कि विकास के नाम पर पर्यावरण की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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