देहरादून: देहरादून की हरी-भरी वादियों में इन दिनों आम और लीची के पेड़ों पर बौर (फूल) छाए हुए हैं, जो न केवल मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए चुनौती भी बन रहे हैं। बौर से निकलने वाला पोलन (पराग) हवा में फैलकर कई लोगों में एलर्जी, खुजली, छींकें, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं पैदा कर रहा है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में एलर्जी से संबंधित मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जो मौसमी बदलाव और शुष्क मौसम के कारण और बढ़ गई है।
देहरादून को आम और लीची के लिए जाना जाता है। शहर और आसपास के इलाकों में इन फलों के बड़े-बड़े बाग हैं, जहां मार्च के महीने में बौर आना शुरू हो जाता है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक है, लेकिन पोलन के छोटे कण हवा के साथ दूर-दूर तक फैल जाते हैं। इनमें से कुछ लोगों को संवेदनशील होने के कारण एलर्जिक राइनाइटिस, कंजंक्टिवाइटिस या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं हो रही हैं। बौर के रोंगटेदार रेशे (फाइन हेयर्स) भी त्वचा पर खुजली पैदा कर रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आरएस बिष्ट ने बताया कि देहरादून में लीची और आम के पेड़ों पर बौर आने से पोलन का स्तर बढ़ गया है, जो एलर्जी का प्रमुख कारण बन रहा है। अस्पताल की ओपीडी में एलर्जी, सांस की तकलीफ और नाक-कान-गले से जुड़े मामलों में कई गुना वृद्धि हुई है। शुष्क मौसम ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। रात में हल्की ठंडक और दिन में गर्मी के कारण हवा में धूल के कण बढ़ गए हैं, जो पोलन के साथ मिलकर एलर्जी ट्रिगर कर रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, मार्च में देहरादून में ट्री पोलन (वृक्ष पराग) का स्तर हाई से बहुत हाई तक पहुंच रहा है, जिसमें आम और लीची जैसे फलों के पेड़ प्रमुख योगदान दे रहे हैं।
शुष्क हवाएं और कम नमी के कारण पोलन आसानी से हवा में तैरता रहता है, जिससे संवेदनशील लोगों को परेशानी हो रही है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से पोलन सीजन पहले शुरू हो गया है और स्तर सामान्य से अधिक है। उत्तराखंड में आमतौर पर मार्च-अप्रैल में ट्री पोलन पीक पर होता है, लेकिन शुष्क मौसम ने इसे और तेज कर दिया है।
डॉक्टरों की सलाह है कि पोलन से बचाव के लिए सुबह के समय जब पोलन का स्तर सबसे अधिक होता है, तो बाहर निकलते समय मास्क जरूर लगाएं। अगर किसी को पहले से पराग एलर्जी है, तो आम और लीची के पेड़ों के आसपास जाने से बचें। घर में खिड़कियां बंद रखें, एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें और नियमित रूप से नाक सलाइन वॉश से साफ करें। एलर्जी के लक्षण दिखने पर एंटीहिस्टामाइन दवाएं या डॉक्टर से परामर्श लें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वे अधिक संवेदनशील होते हैं।
यह समस्या मौसमी है और कुछ हफ्तों में बौर गिरने के बाद कम हो जाएगी, लेकिन तब तक सतर्क रहना जरूरी है। देहरादूनवासियों को सलाह दी जाती है कि प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें, लेकिन स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें। यदि लक्षण गंभीर हों जैसे सांस फूलना या सीने में जकड़न, तो तुरंत अस्पताल पहुंचें।

