Tuesday, January 13, 2026
HomeNewsलोहाघाट में सैकड़ों देवदार के वृक्षों का अस्तित्व संकट में

लोहाघाट में सैकड़ों देवदार के वृक्षों का अस्तित्व संकट में

चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले के खूबसूरत लोहाघाट क्षेत्र में देवदार के घने जंगलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। नगर क्षेत्र में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों, अतिक्रमण और अवैध कटान के कारण इन दुर्लभ वृक्षों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। सोशल मीडिया पर देवदार पेड़ों के सूखने की तस्वीरें वायरल होने के बाद जिला प्रशासन और वन विभाग हरकत में आया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार के निर्देश पर वन विभाग ने सूखते पेड़ों का उपचार शुरू किया है, साथ ही अज्ञात लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय निवासी भी इस मुद्दे पर गहरी चिंता जता रहे हैं।

लोहाघाट नगर पालिका क्षेत्र में इन ऐतिहासिक और दुर्लभ देवदार वृक्षों को अतिक्रमण की नीयत से रसायन डालकर सुखाने की साजिश का खुलासा हुआ है। मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई की। उप प्रभागीय वन अधिकारी लोहाघाट सुनील कुमार के नेतृत्व में टीम ने एक दर्जन से अधिक हरे देवदार पेड़ों पर गार्डनिंग और विशेष उपचार किया, ताकि उन्हें सुखने से बचाया जा सके। साथ ही, वन संरक्षण अधिनियम के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

हालांकि, देवदार वृक्षों की सुरक्षा को लेकर वर्षों से प्रशासनिक उलझन बनी हुई है। अधिकांश भूमि नजूल श्रेणी की है, जिसकी देखरेख राजस्व विभाग करता है, जबकि पेड़ों की सुरक्षा का दायित्व नगर पालिका और वन विभाग के बीच स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं है। जिलाधिकारी ने जनवरी-फरवरी में क्षेत्रवार विभागीय जिम्मेदारियां तय करने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे व्यावहारिक रूप से लागू करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

लोहाघाट के वरिष्ठ नागरिक और पत्रकार गणेश पांडे ने बताया कि बीते दशकों में अतिक्रमण और अन्य कारणों से नगर क्षेत्र से 12 हजार से अधिक देवदार पेड़ गायब हो चुके हैं। वर्ष 1985 में, जब चंपावत पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा था, तत्कालीन जिलाधिकारी विजेंद्र पाल ने प्रत्येक देवदार पेड़ की नंबरिंग कर करीब 15 हजार पेड़ों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कराया था। वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी चौधरी द्वारा कराई गई गिनती में यह संख्या घटकर 12 हजार रह गई। उसके बाद अवैध कटान और अतिक्रमण जारी रहा, यहां तक कि दिनदहाड़े पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने लगी। वन विभाग ने जुर्माना लगाया, लेकिन इसकी गहन जांच या स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

पांडे ने देवदार वृक्षों के संरक्षण के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनका नियंत्रण सीधे थाने से करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्र में देवदार वन क्षेत्र की पूर्ण सुरक्षा वन विभाग को सौंपी जाए, जबकि नगर पालिका और वन विभाग की संयुक्त गश्त नियमित रूप से की जाए। साथ ही, वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को लिखित रूप से पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी देकर उन्हें सहभागी बनाया जाए, ताकि वे इन्हें अपनी धरोहर समझकर बचाएं।

लोहाघाट क्षेत्र मायावती आश्रम और रीठा साहिब जैसे धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, जहां दिल्ली, कोलकाता, मुंबई जैसे महानगरों से पर्यटक और तीर्थयात्री आते हैं। ये देवदार वृक्ष उनके लिए आकर्षण का केंद्र हैं, लेकिन यदि संरक्षण नहीं हुआ तो पर्यटन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। प्रशासन की यह कार्रवाई उम्मीद की किरण है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सभी हितधारकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

RELATED ARTICLES