देहरादून: भारत की स्किल डेवलपमेंट यात्रा में वर्ल्ड बैंक समर्थित स्ट्राइव (स्किल्स स्ट्रेंग्थनिंग फॉर इंडस्ट्रियल वैल्यू एन्हांसमेंट) योजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। 2017 से 2024 तक चली इस योजना के तहत वर्ल्ड बैंक से 2,200 करोड़ रुपये का ऋण लेकर आईटीआई संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया था। नीति आयोग की 2023 रिपोर्ट ‘ट्रांसफॉर्मिंग इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स’ के अनुसार, योजना के विभिन्न परिणाम क्षेत्रों (रिजल्ट एरिया) के तहत राज्यों को कुल 68.54 करोड़ रुपये वितरित किए गए। लेकिन फंडिंग का वितरण असमान रहा—उत्तराखंड के मात्र 5 आईटीआई को शामिल कर राज्य को 2.72 करोड़ रुपये मिले, जबकि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश के 21 आईटीआई को 4.94 करोड़। यह अंतर न केवल वित्तीय है, बल्कि पहाड़ी राज्यों के युवाओं के रोजगार अवसरों से जुड़ा है।
योजना की नींव और लक्ष्य
भारत में युवा बेरोजगारी दर 2024 में 23% से ऊपर रही, जहां स्किल गैप एक प्रमुख बाधा है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 तक 40 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। स्ट्राइव इसी कमी को दूर करने के लिए शुरू हुई। वर्ल्ड बैंक दस्तावेजों से पता चलता है कि योजना का फोकस आईटीआई की क्षमता वृद्धि, प्रशिक्षक सुधार, पाठ्यक्रम आधुनिकीकरण और अप्रेंटिसशिप मजबूती पर था। कुल 500 आईटीआई (400 सरकारी, 100 निजी) चयनित हुए, जो 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले।
चयन ग्रेडिंग सिस्टम पर आधारित था—सरकारी आईटीआई के लिए न्यूनतम ग्रेड 2.0 और निजी के लिए 2.5। फंडिंग परिणाम-आधारित (परफॉर्मेंस बेस्ड) थी, जहां की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (केवीपीआई) पर निर्भर। आईआईएम इंदौर सत्यापन एजेंसी था। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (डीजीटी) की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक 10 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हुए। क्षमता उपयोग 48% बढ़ा, महिला नामांकन 6.6% से 14% हो गया। अप्रेंटिसशिप अनुबंध 2017 के 50,000 से बढ़कर 1.5 लाख हो गए। हालांकि, प्लेसमेंट दर मात्र 0.09% रही, जो एक बड़ी कमजोरी है।
राष्ट्रीय उपलब्धियां
स्ट्राइव ने कई राज्यों में सकारात्मक बदलाव लाए। पश्चिम बंगाल के नकाशीपारा जीआईटीआई में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल से ग्रेड 4.42 पहुंचा, जहां प्लेसमेंट रेट 80% से अधिक है। पुणे के आईटीआई को वोल्क्सवैगन ने 80 लाख रुपये का सीएसआर फंड दिया। डीजीटी के ट्रेसर स्टडी (2024) से पता चलता है कि 31.6% पासआउट वेज जॉब में, 7.9% स्वरोजगार में और 9.5% अप्रेंटिसशिप में हैं। औसत मासिक आय 11,403 रुपये। इंजीनियरिंग ट्रेड्स (फिटर, इलेक्ट्रीशियन) में सफलता अधिक रही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय अवसरों की कमी बाधा बनी।
उत्तराखंड: सीमित फंड, सीमित प्रभाव
उत्तराखंड में कुल 189 संबद्ध आईटीआई हैं, लेकिन स्ट्राइव के तहत मात्र 5 चयनित (4 आरए1, 1 आरए4)। नीति आयोग रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को 2.32 करोड़ (आरए1) और 0.40 करोड़ (आरए4) मिले, कुल 2.72 करोड़। लोकसभा प्रश्न के जवाब (मार्च 2023) में बताया गया कि राज्य को 27.06 करोड़ आवंटित हुए, लेकिन मात्र 8.55 करोड़ जारी। 2023-24 में अतिरिक्त 8 करोड़ जारी हुए, लेकिन कुल उपयोग सीमित रहा।
राज्य के आईटीआई ग्रेड औसत 2.64 है, सर्वोच्च चंबा जीआईटीआई। 25,424 सीटों में 35% ही भरीं, महिला छात्राएं 14.39%। प्लेसमेंट डेटा न्यूनतम। पहाड़ी भूगोल और कम उद्योगीकरण (जीडीपी में 30% कृषि-पर्यटन) मुख्य चुनौतियां। देहरादून और नैनीताल जैसे जिलों में आईटीआई हैं, लेकिन पर्यटन-आधारित ट्रेड्स (जैसे होटल मैनेजमेंट) की कमी। ट्रेसर स्टडी में उत्तराखंड के 8 नियोक्ताओं ने बताया कि व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग लिंकेज बढ़ाने की जरूरत है। राज्य सरकार ने परफॉर्मेंस बेस्ड फंडिंग एग्रीमेंट (पीबीएफए) में लक्ष्य कम रखे, जिससे फंड सीमित रहा।
हिमाचल प्रदेश: अधिक सहायता, बेहतर परिणाम
हिमाचल में 268 आईटीआई हैं, जिनमें 21 स्ट्राइव के तहत चयनित (19 आरए1, 1 आरए2, 1 आरए4 +1 एसपीआईयू)। नीति आयोग के अनुसार, राज्य को 3.96 करोड़ (आरए1), 0.28 करोड़ (आरए2), 0.40 करोड़ (आरए4) और 0.30 करोड़ (एसपीआईयू) मिले, कुल 4.94 करोड़। 2023-24 में अतिरिक्त 15 करोड़ (5वीं और 4वीं किस्त) जारी हुए, जिससे कुल रिलीज 7.49 करोड़ के करीब पहुंची।
42,360 सीटों में 48% उपयोग, महिला 22.75%। प्रशिक्षक पद भराव 62%। बैजनाथ और हमीरपुर आईटीआई में उपकरण अपग्रेड से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड मजबूत हुआ। राज्य ने 7 इंडस्ट्री क्लस्टर चयनित कर अप्रेंटिसशिप बढ़ाई। ट्रेसर स्टडी (2021) में 1,129 पासआउट सर्वे हुए, जहां 66% ने ऑन-जॉब ट्रेनिंग ली। 60% ग्रेजुएट्स ने नौकरी पाई, मुख्यतः फार्मा और हाइड्रो सेक्टर में। हिमाचल की सफलता सक्रिय नीतियों से है—ट्रेसर स्टडी रिपोर्ट से 60% प्लेसमेंट दर।
असमानता के कारण और प्रभाव
दोनों पहाड़ी राज्य साझा चुनौतियों (दुर्गमता, कम उद्योग) का सामना करते हैं, लेकिन हिमाचल को अधिक फंड मिलने से बेहतर परिणाम। उत्तराखंड में उद्योग कम, जबकि हिमाचल में फार्मा मजबूत। नीति आयोग रिपोर्ट में ‘विशस चक्र’ का जिक्र—कम नामांकन से कम उपयोग, पुराना पाठ्यक्रम से उद्योग असंगति। प्रशिक्षक कमी 36%, वित्त का 90% वेतन पर खर्च। ग्रामीण आईटीआई शहरी से पीछे।
चुनौतियां और सुझाव
स्ट्राइव समाप्ति के बाद भी समस्याएं बरकरार। डीजीटी ट्रेसर स्टडी से 51% बेरोजगार, महिलाओं में 62.5%। नियोक्ता व्यावहारिक ट्रेनिंग की मांग करते हैं। नीति आयोग की सिफारिशें: सात-आयामी सुधार (शासन, वित्त, साझेदारी), एनएसटीआई विस्तार, एमएसएमई टाई-अप, महिला-विशेष आईटीआई, केंद्रीकृत एडमिशन। विशेषज्ञों का कहना है कि कम ग्रेड वाले आईटीआई के लिए जरूरत-आधारित फंडिंग हो। 2025 में ‘कुशल भारत’ स्कीम के तहत 5,000 करोड़ का प्रावधान है, जिसमें पहाड़ी राज्यों को विशेष पैकेज मिलना चाहिए।

