उत्तराखंड की धामी सरकार अवैध मदरसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है। प्रदेश में सैकड़ों अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है। हरिद्वार में भी पुलिस-प्रशासन ने सत्यापन के बाद कई बिना रजिस्ट्रेशन वाले मदरसों को सील कर दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनकी सुनवाई मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को हुई।
न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मदरसों को निर्देश दिया कि वे जिला माइनॉरिटी वेलफेयर अधिकारी को शपथ पत्र सौंपें, जिसमें यह आश्वासन हो कि जब तक सरकार से मान्यता नहीं मिलती, तब तक मदरसों में कोई धार्मिक शिक्षण या नमाज़ की गतिविधियां नहीं होंगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन भवनों में क्या गतिविधियां होंगी, इसका निर्णय राज्य सरकार लेगी। तब तक ये मदरसे बंद रहेंगे।
हरिद्वार के जामिया राजबिया फैजुल कुरान, मदरसा दारुल कुरान, मदरसा नुरूहुदा एजुकेशन ट्रस्ट, मदरसा सिराजुल कुरान अरबिया रासदिया सोसाइटी और दारुल उलूम सबरिया सिराजिया सोसाइटी ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इनका दावा था कि जिला प्रशासन ने नियमों का पालन किए बिना उनके मदरसों को सील कर दिया, जबकि इनमें शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन बोर्ड की बैठक न होने के कारण पंजीकरण लंबित है। उन्होंने मांग की थी कि पंजीकरण होने तक सील हटाई जाए।
उत्तराखंड सरकार ने याचिकाकर्ताओं की इस मांग का कड़ा विरोध किया। सरकार का पक्ष था कि अवैध रूप से चल रहे मदरसों पर कार्रवाई नियमों के तहत की गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले से अवैध मदरसों के संचालन पर और सख्ती बढ़ने की संभावना है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इन भवनों का भविष्य में क्या उपयोग होगा।

