Sunday, February 8, 2026
HomeNewsस्वदेश दर्शन से पिथौरागढ़ और चंपावत में अनूठे पर्यटक स्थल होंगे तैयार

स्वदेश दर्शन से पिथौरागढ़ और चंपावत में अनूठे पर्यटक स्थल होंगे तैयार

देहरादून: उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम देने के लिए भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत पिथौरागढ़ और चंपावत जिलों में अनूठे पर्यटक स्थल विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के जरिए न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का मौका भी मिलेगा। पिथौरागढ़ के गुंजी में रूरल टूरिज्म क्लस्टर और चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस थीम पर आधारित ये पहल स्थानीय रोजगार और सतत विकास को गति देगी।

भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 का उद्देश्य थीम आधारित पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजना है। इस योजना के तहत उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में प्राकृतिक सुंदरता, लोककला और पारंपरिक जीवनशैली को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है। पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे सीमांत जिलों को चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार इन क्षेत्रों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन परियोजनाओं का पूरा खर्च भारत सरकार वहन कर रही है, जिसके लिए पिथौरागढ़ में 17.86 करोड़ और चंपावत में 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। दोनों परियोजनाओं के लिए 10% राशि पहले ही जारी हो चुकी है, और टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है।

पिथौरागढ़: गुंजी में रूरल टूरिज्म क्लस्टर

नेपाल और तिब्बत की सीमा से सटे पिथौरागढ़ का गुंजी गांव सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद खास है। यहां रूरल टूरिज्म क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जो पर्यटकों को कुमाऊंनी संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव कराएगा। इस परियोजना के तहत कई पहल की जाएंगी:

  • होमस्टे और कॉटेज: स्थानीय शैली में बने होमस्टे और कॉटेज पर्यटकों को ग्रामीण परिवेश में ठहरने का अनूठा अनुभव देंगे।

  • लोककला और व्यंजन: कुमाऊंनी लोकगीत, वाद्य यंत्र और पारंपरिक व्यंजनों जैसे मडुवे की रोटी, भट्ट की चुरकानी को पर्यटन पैकेज का हिस्सा बनाया जाएगा।

  • हस्तशिल्प बाजार: ऊन, बांस और लकड़ी से बने स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों के लिए क्लस्टर मार्केट तैयार होगा, जिससे स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा मिलेगा।

  • एडवेंचर और नेचर वॉक: ट्रैकिंग, नेचर वॉक और साहसिक गतिविधियों के साथ पर्यटकों को हिमालय की गोद में प्रकृति का आनंद लेने का मौका मिलेगा।

  • आधारभूत ढांचा: सड़कों का सुधार, पैदल रास्ते, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

यह परियोजना न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगी।

चंपावत: टी गार्डन एक्सपीरियंस

चंपावत में टी गार्डन एक्सपीरियंस थीम पर आधारित पर्यटन स्थल विकसित किया जा रहा है, जो चाय बागानों की सुंदरता और संस्कृति को पर्यटकों के सामने लाएगा। इस परियोजना की खासियतें हैं:

  • चाय बागान भ्रमण: पर्यटक चाय की खेती, पत्तियों की तुड़ाई और पारंपरिक चाय निर्माण प्रक्रिया को करीब से देख सकेंगे।

  • चाय का स्वाद: विभिन्न प्रकार की चाय का स्वाद चखने के साथ-साथ पर्यटक चाय बागानों के बीच नेचर वॉक और हेरिटेज ट्रेल्स का आनंद ले सकेंगे।

  • स्थानीय उत्पादों का प्रचार: चाय, शहद, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को पर्यटन पैकेज में शामिल किया जाएगा।

  • आवास और सांस्कृतिक आयोजन: चाय बागानों के पास पर्यटक आवास विकसित होंगे, और स्थानीय मेलों व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल

ये परियोजनाएं स्थानीय समुदायों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी। होमस्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों के प्रचार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। साथ ही, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। दोनों परियोजनाओं को अगले एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है, जिसके बाद ये डेस्टिनेशन देसी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।

स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत ये पहल उत्तराखंड के सीमांत जिलों को वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर लाएगी। पिथौरागढ़ और चंपावत जैसे कम चर्चित क्षेत्रों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, और ये परियोजनाएं इन क्षेत्रों को नई पहचान दिलाएंगी। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये डेस्टिनेशन अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरेंगे, जिससे न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण भी होगा।

पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इन परियोजनाओं में सहयोग करें और स्थानीय उत्पादों व संस्कृति को बढ़ावा देने में योगदान दें। इन पहलों से उत्तराखंड का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छूएगा, और राज्य की प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर गौरव प्राप्त होगा।

RELATED ARTICLES