देहरादून: NTI (स्पेशल रिपोर्ट) : उत्तराखंड सरकार इस 25वें स्थापना वर्ष को भव्य रूप से मना रही है, साथ ही पिछले दो दशकों के विकास कार्यों का मूल्यांकन कर भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार कर रही है। इन 25 वर्षों में राज्य ने पर्यटन, बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में लंबी छलांग लगाई है। खासकर हेली सेवाओं के विस्तार ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों को आसानी से जोड़ा है, जो राज्य की आर्थिक और पर्यटन वृद्धि का मजबूत आधार बन चुका है।
उत्तराखंड के गठन के समय राज्य में मात्र पांच एयरस्ट्रिप्स मौजूद थीं – जौलीग्रांट एयरपोर्ट, पंतनगर एयरपोर्ट, गौचर, चिन्यालीसौड़ और पिथौरागढ़ हेलीपैड। लेकिन व्यावसायिक हेली सेवाओं का संचालन केवल जौलीग्रांट और पंतनगर से ही हो पा रहा था। कम यात्री संख्या हमेशा एक बड़ी बाधा रही, जिसके कारण कई हेली सेवाएं शुरू होते ही बंद हो गईं। 2011 में केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा शुरू हुई, लेकिन समग्र व्यावसायिक संचालन बेहद सीमित था।
2013: यूकाडा का गठन
इस दिशा में बड़ा कदम 2013 में उठाया गया, जब राज्य सरकार ने उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) का गठन किया। उसी वर्ष जून में केदार घाटी में आई भयावह आपदा ने हेली सेवाओं की अनिवार्यता को उजागर कर दिया। आपदा राहत और पुनर्वास में हेलीकॉप्टरों की भूमिका ने सरकार को जागृत किया, जिसके बाद नए हेलीपैडों का निर्माण तेज हो गया। आज राज्य में 90 हेलीपैड और 7 हेलीपोर्ट कार्यरत हैं, जबकि 6 अन्य हेलीपोर्टों का निर्माण चल रहा है।
2020 से हेली क्रांति की शुरुआत
केंद्र सरकार की उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना ने उत्तराखंड की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयां दीं। 21 अक्टूबर 2016 को शुरू हुई इस योजना के तहत राज्य में पहली हेली सेवाएं फरवरी 2020 से चलीं। वर्तमान में उड़ान के अंतर्गत 18 हेली रूट्स और 6 विमान रूट्स पर सेवाएं संचालित हैं। प्रस्तावित रूप से 10 और हेली रूट्स जोड़े जाने हैं।
उत्तराखंड हवाई संपर्क योजना
उड़ान योजना के दायरे से बाहर रह गए क्षेत्रों को जोड़ने के लिए 2023 में उत्तराखंड हवाई संपर्क योजना शुरू की गई। 4 दिसंबर 2023 को मंजूर हुई उत्तराखंड हेलीपैड एवं हेलीपोर्ट नीति के तहत 6 हेली रूट्स और 2 विमान रूट्स पर सेवाएं चल रही हैं।
मॉडल हेलीपोर्ट से एक्सपेंशन तक
राज्य गठन के समय दो एयरपोर्ट्स (जौलीग्रांट और पंतनगर) से ही व्यावसायिक सेवाएं चलती थीं, लेकिन अब इंफ्रास्ट्रक्चर में जबरदस्त बदलाव आया है। देहरादून का सहस्त्रधारा हेलीपैड अब पूर्ण हेलीपोर्ट बन चुका है, जिसे देश का मॉडल हेलीपोर्ट घोषित किया गया। नैनी सैनी एयरपोर्ट को देहरादून और दिल्ली से जोड़ा गया। पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 804 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई, जिसमें से 524 एकड़ एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंपी जा चुकी है – निर्माण शीघ्र शुरू होगा।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने बताया, “वर्तमान में राज्य में 90 हेलीपैड हैं, जिनमें कुछ निजी क्षेत्र के भी शामिल हैं। 13 हेलीपोर्टों का लक्ष्य है – 7 पूर्ण, 6 निर्माणाधीन। पांच नए हेलीपोर्टों को मंजूरी मिल चुकी है, जिनकी जमीन चिन्हांकन प्रक्रिया चल रही है। एयरपोर्ट की तर्ज पर ये बनाए जा रहे हैं, ताकि पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधा मिले।”
गौचर-चिन्यालीसौड़ का व्यावसायिक उपयोग
दूरस्थ क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए गौचर और चिन्यालीसौड़ हेलीपैड का व्यावसायिक उपयोग सुनिश्चित करने की कार्ययोजना 30 दिसंबर 2025 तक तैयार हो जाएगी। कुर्वे ने कहा, “हेली सेवाएं न केवल राज्य के आंतरिक शहरों को जोड़ रही हैं, बल्कि पर्यटन और आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी भूमिका निभा रही हैं। रजत जयंती के अवसर पर हम हवाई संपर्क को और विस्तृत बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेंगे।”

