Sunday, February 8, 2026
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हल्द्वानी-हरिद्वार एलिवेटेड रोड और लालकुआं बाईपास को केंद्र से मंजूरी

लालकुआं/हल्द्वानी: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में यातायात व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाली दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी मिल गई है। हल्द्वानी से हरिद्वार तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण की योजना को राष्ट्रीय राजमार्ग विकास विभाग (एनएचडी) ने हरी झंडी दे दी है, जबकि लालकुआं बाईपास प्रोजेक्ट के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो चुकी है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल स्थानीय यात्रियों को समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी अपार लाभ पहुंचेगा। सांसद अजय भट्ट ने इन उपलब्धियों पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि कुमाऊं का विकास अब नई गति पकड़ लेगा।

कुमाऊं क्षेत्र, जो हिमालय की गोद में बसा यह हरा-भरा मंडल पर्यटन और कृषि का प्रमुख केंद्र है, लंबे समय से बेहतर सड़क संपर्क की बाट जोह रहा था। हल्द्वानी, जो कुमाऊं का प्रवेश द्वार माना जाता है, से हरिद्वार तक की वर्तमान यात्रा में करीब चार से पांच घंटे लग जाते हैं। इसमें ट्रैफिक जाम, दुर्गम रास्तों और मौसमी बाधाओं का बड़ा योगदान रहता है। लेकिन अब एलिवेटेड रोड के निर्माण से यह दूरी घटकर मात्र दो से ढाई घंटे रह जाएगी। सांसद अजय भट्ट ने बताया, “मैंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की थी। उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद एनएचडी ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना न केवल कुमाऊंवासियों की दैनिक यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि पूरे उत्तराखंड को जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी साबित होगी।”

एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 150 किलोमीटर बताई जा रही है, जो हल्द्वानी से शुरू होकर काठगोदाम, लालकुआं, रुद्रपुर होते हुए हरिद्वार तक विस्तारित होगी। इस मार्ग पर आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें ऊंचे स्तंभों पर आधारित फ्लाईओवर, सुरंगें और इंटरचेंज शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोड चार लेन का होगा, जिसकी डिजाइन स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इससे न केवल वाहनों की गति बढ़ेगी, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी भी आएगी। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि एलिवेटेड संरचना से जमीन पर वनों और कृषि भूमि को न्यूनतम क्षति पहुंचेगी। केंद्रीय मंत्रालय ने अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये बताई है, जिसका निर्माण कार्य अगले वित्तीय वर्ष से शुरू होने की संभावना है।

दूसरी ओर, लालकुआं बाईपास प्रोजेक्ट कुमाऊं के यातायात दबाव को कम करने का एक और बड़ा कदम है। लालकुआं, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर स्थित एक व्यस्त शहर है, रोजाना हजारों भारी वाहनों का आवागमन झेलता है। इससे शहर में ट्रैफिक कंजेशन, प्रदूषण और दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। बाईपास के निर्माण से शहर को बायपास करते हुए वाहन सीधे आगे बढ़ सकेंगे, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। सांसद भट्ट ने कहा, “लालकुआं बाईपास की डीपीआर तैयार करने का कार्य प्रारंभ हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। यह 12 किलोमीटर लंबा बाईपास होगा, जिसकी लागत लगभग 800 करोड़ रुपये आंकी गई है। इससे भारी ट्रकों को शहर में घुसने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और व्यापारिक मार्ग सुगम हो जाएगा।”

इन परियोजनाओं का प्रभाव कुमाऊं के आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा पड़ेगा। कुमाऊं मंडल, जिसमें नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जैसे जिले शामिल हैं, धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे तीर्थस्थलों तक पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालु इन मार्गों का उपयोग करते हैं। एलिवेटेड रोड से कुंभ मेला या अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यात्रा आसान हो जाएगी। पर्यटन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटकों की संख्या में 20-30 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। उदाहरण के लिए, नैनीताल झील या भीमताल जैसे स्थलों पर आने वाले सैलानी हरिद्वार घूमने के लिए अधिक उत्साहित होंगे।

व्यापारिक दृष्टि से भी ये परियोजनाएं वरदान साबित होंगी। कुमाऊं का तराई क्षेत्र चाय, फल और सब्जियों का प्रमुख उत्पादक है। लालकुआं बाईपास से दिल्ली-हल्द्वानी मार्ग पर माल ढुलाई तेज होगी, जिससे किसानों और व्यापारियों को लाभ मिलेगा। सांसद भट्ट ने जोर देकर कहा, “ये परियोजनाएं कुमाऊं के धार्मिक, पर्यटन और व्यापारिक क्षेत्रों को मजबूत करेंगी। क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। निर्माण कार्य में स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों को प्राथमिकता दी जाएगी।”

हालांकि, इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और पर्यावरणीय मंजूरी जैसे मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहते हैं। लेकिन केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त प्रयासों से इन्हें हल करने का विश्वास है। पिछले वर्ष चारधाम यात्रा मार्ग परियोजना के सफल क्रियान्वयन ने इसी तरह की उम्मीद जगाई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि स्थानीय समुदायों को प्रोजेक्ट में भागीदार बनाया जाए, ताकि उनका सहयोग सुनिश्चित हो।

कुल मिलाकर, हल्द्वानी-हरिद्वार एलिवेटेड रोड और लालकुआं बाईपास जैसी परियोजनाएं उत्तराखंड के विकास की नई कहानी लिखेंगी। सांसद अजय भट्ट की केंद्रीय स्तर पर सक्रियता सराहनीय है, जो क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर उठा रही है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से कुमाऊं न केवल बेहतर जुड़ा हुआ होगा, बल्कि एक समृद्ध और समावेशी क्षेत्र के रूप में उभरेगा। उम्मीद है कि जल्द ही इन मार्गों पर वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी, और कुमाऊंवासी नई सुबह का स्वागत करेंगे।

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