Sunday, February 8, 2026
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आंदोलनकारियों व आश्रितों की पेंशन में भारी बढ़ोतरी

देहरादून : उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों को सच्ची श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की रजत जयंती के अवसर पर आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए पेंशन व सुविधाओं में ऐतिहासिक वृद्धि की घोषणा की। पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित राज्य आंदोलनकारी सम्मान समारोह में सीएम ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की, जबकि कचहरी परिसर शहीद स्थल पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कर भावुक क्षण पैदा हो गया। इस समारोह में सैकड़ों आंदोलनकारियों और शहीद परिवारजनों को सम्मानित किया गया, जो राज्य निर्माण के संघर्ष की जीती-जागती यादें हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तराखंड का निर्माण केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों के बलिदान, संघर्ष और तप का परिणाम है। खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी दर्दनाक घटनाएं हमारे इतिहास के अमर अध्याय हैं।” उन्होंने ज्ञात-अज्ञात सभी बलिदानियों को नमन करते हुए जोर दिया कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रहेगी। आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग की इन घटनाओं ने 1994 में करीब 40 से अधिक जानें लीं, जिसमें खटीमा (अक्टूबर 1994, 7 शहीद), मसूरी (अक्टूबर 1994, 5 शहीद) और रामपुर तिराहा (अक्टूबर 1994, 7 शहीद) प्रमुख हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कुल 25 शहीद हुए, लेकिन अनौपचारिक स्रोतों में यह संख्या कहीं अधिक बताई जाती है। पहला शहीद 8 अगस्त 1994 को पौड़ी में जीत बहादुर गुरुंग थे, जबकि 1 सितंबर 1994 को आंदोलन का सबसे काला दिन माना जाता है।

सात प्रमुख घोषणाएं: कृतज्ञता का प्रतीक

सीएम धामी ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए संचालित पेंशन व अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सहायता नहीं, बल्कि हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है। रजत जयंती वर्ष के इस अवसर पर उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

  1. शहीदों के नाम पर नामकरण: शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्र की मुख्य अवस्थापना सुविधाओं (जैसे अस्पताल, स्कूल) का नामकरण किया जाएगा।
  2. जेल/घायल आंदोलनकारियों की पेंशन वृद्धि: राज्य आंदोलन के दौरान 7 दिन जेल गए या घायल हुए आंदोलनकारियों की मासिक पेंशन 6,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये की जाएगी।
  3. अन्य आंदोलनकारियों की पेंशन: जेल/घायल श्रेणी से बाहर अन्य राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये मासिक होगी।
  4. विकलांग आंदोलनकारियों के लिए विशेष पैकेज: आंदोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए आंदोलनकारियों की पेंशन 20,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाएगी। साथ ही, उनकी देखभाल के लिए मेडिकल अटेंडेंट की व्यवस्था की जाएगी।
  5. शहीद आश्रितों की पेंशन: शहीद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों की मासिक पेंशन 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये की जाएगी।
  6. चिन्हीकरण के लिए समय विस्तार: आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालयों में लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए 6 माह का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।
  7. शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण: समस्त शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण व संरक्षण किया जाएगा।

ये घोषणाएं राज्य के करीब 10,000 आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सीधे लाभान्वित करेंगी, जो आंदोलन के 30 वर्षों के संघर्ष का फल है। वर्तमान में राज्य सरकार आंदोलनकारियों के लिए मासिक पेंशन के अलावा मुफ्त यात्रा, चिकित्सा सुविधाएं और भूमि आवंटन जैसी योजनाएं चला रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार आंदोलनकारियों के योगदान को सदैव सम्मानपूर्वक याद रखेगी और उनकी भावना को प्रत्येक नीति एवं निर्णय में स्थान देगी।” उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि राज्य स्थापना दिवस (9 नवंबर) पर अपने घरों में पांच दीपक आंदोलनकारियों की स्मृति में अवश्य जलाएं। सीएम ने जोर दिया, “उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य आंदोलन की भावना ही हमारी प्रेरणा है। सभी से इस प्रयास में सहभागिता का आह्वान करता हूं।”

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