नैनीताल: नैनीताल का ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान (Flats Maidan), जो शहर का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान है, अब खिलाड़ियों के प्रदर्शन से ज्यादा कब्जे और लीज विवाद के कारण सुर्खियों में है। नगर पालिका बोर्ड इस मैदान को किसी भी हाल में खेल विभाग को लीज पर देने के मूड में नहीं दिख रहा है, जबकि नगर पालिका में प्रशासक के कार्यकाल के दौरान ही 27 जनवरी 2025 को शासन की मौजूदगी में 30 वर्षीय लीज अनुबंध पर हस्ताक्षर हो चुके थे। इस विवाद ने खेल गतिविधियों को प्रभावित किया है और हाल ही में क्रिकेट प्रतियोगिताओं तक को स्थगित होना पड़ा है।
कांग्रेस समर्थित पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल के इस मुद्दे पर सख्त रुख को आश्चर्यजनक रूप से भाजपा के कुछ सभासदों का भी समर्थन मिला है। दोनों पार्टियों के प्रतिनिधि मैदान को नगर पालिका की संपत्ति मानते हुए उसके हस्तांतरण का विरोध कर रहे हैं। डॉ. खेतवाल ने स्पष्ट किया है कि फ्लैट्स मैदान नैनीताल की धरोहर है और इसे पालिका बोर्ड की अनुमति के बिना किसी अन्य विभाग को नहीं सौंपा जा सकता। उन्होंने कहा कि मैदान का स्वामित्व नगर पालिका के पास है और बिना बोर्ड की स्वीकृति के लीज अनुबंध नियमों के विरुद्ध है।
लीज अनुबंध की मुख्य बातें
प्रशासक काल में 27 जनवरी 2025 को नगर पालिका के ईओ और उपनिदेशक क्रीड़ा के बीच नजूल भूमि लीज अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए थे। इस अनुबंध के तहत फ्लैट्स मैदान का कुल क्षेत्रफल 214050.969 वर्ग मीटर खेल विभाग को 30 वर्ष के लिए लीज पर दिया गया। लीज धारक के रूप में खेल विभाग मैदान पर काबिज रहेगा। किराया नजूल मैनुअल के नियमों के अनुसार निर्धारित होगा। खेल विभाग 30 वर्ष तक यहां क्रीड़ा गतिविधियां संचालित करेगा और आवश्यक संसाधन स्थापित करेगा।
अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान हैं कि जिला क्रीड़ा संघ द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित चार प्रमुख प्रतियोगिताओं को खेल विभाग अपने वार्षिक कैलेंडर में शामिल करेगा। इन प्रतियोगिताओं के लिए खेल विभाग आर्थिक सहयोग और प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। खेल गतिविधियों से होने वाली आय का 50 प्रतिशत नगर पालिका को दिया जाएगा।
इस लीज का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र प्रदान करना था, जो प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों में लाभ देते हैं। पहले जिला क्रीड़ा संघ (डीएसए) द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के प्रमाण पत्रों को कोई शासकीय मान्यता नहीं मिलती थी, जिससे खिलाड़ियों को प्रतिभाग और आरक्षण का लाभ नहीं होता था। लीज के बाद खेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने से यह समस्या दूर होनी थी।
विवाद की जड़
हाल के दिनों में यह विवाद चरम पर पहुंच गया। जनवरी 2026 में स्व. पृथ्वीराज सिंह बिष्ट स्मृति क्रिकेट प्रतियोगिता के दौरान नगर पालिका और खेल विभाग आमने-सामने आ गए। खेल विभाग ने मैदान पर पिच तैयार कराई थी (लागत करीब 3 लाख रुपये), लेकिन पालिकाध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल के नेतृत्व में 50 से अधिक लोग पहुंचे और पिच पर कब्जा करने का आरोप लगा। खेल विभाग ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। विवाद के कारण 32 टीमों वाली प्रतियोगिता अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई।
नगर पालिका का कहना है कि मैदान उसकी संपत्ति है और खेल विभाग द्वारा बिना अनुमति के कब्जा गैरकानूनी है। खेल विभाग का तर्क है कि शासन स्तर पर लीज अनुबंध वैध है और वह मैदान का प्रबंधन कर रहा है। इस बीच, मैदान पर समतलीकरण कार्य भी चल रहा है, जो 70 प्रतिशत पूरा हो चुका है। खेल विभाग ने मैदान को केवल खेल और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयोग करने की योजना बनाई है।
जिला क्रीड़ा संघ में अनियमितताओं की जांच
यह भी उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की जांच में जिला क्रीड़ा संघ (डीएसए) में लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट अभी कार्रवाई के इंतजार में है। इससे पहले डीएसए द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रमाण पत्रों की मान्यता न होने से खिलाड़ी प्रभावित होते थे। अब लीज के बाद खेल विभाग द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं, लेकिन विवाद के कारण गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था। अगस्त 2025 में एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने कहा कि फिलहाल स्थानीय टूर्नामेंट पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती और खेल गतिविधियां जारी रहनी चाहिए।
नैनीताल का फ्लैट्स मैदान शहर की खेल संस्कृति का केंद्र है। यहां से कई प्रतिभाएं उभरी हैं। विवाद से न केवल क्रिकेट बल्कि अन्य खेल प्रभावित हो रहे हैं। खिलाड़ी, कोच और स्थानीय संगठन जैसे मक्कार स्पोर्ट्स ग्रुप ने चिंता जताई है कि राजनीतिक प्रतिष्ठा के चलते खेल भावना दांव पर लग रही है।
पालिका और खेल विभाग के बीच यह टकराव जल्द सुलझना जरूरी है, ताकि मैदान का उपयोग निर्बाध रूप से हो सके। यदि मामला कोर्ट में लंबा खिंचा तो खेल गतिविधियां और प्रभावित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों को संवाद से समाधान निकालना चाहिए, क्योंकि मैदान नैनीताल की साझा धरोहर है।

