देहरादून में होप्लो भृंग (होप्लोसेराम्बिक्स स्पिनिकॉर्निस) के प्रकोप से लगभग 25 हजार साल के पेड़ गंभीर रूप से प्रभावित हो गए हैं। ये पेड़ या तो मर चुके हैं या मरने की कगार पर हैं। संक्रमण को स्वस्थ पेड़ों में फैलने से रोकने के लिए वन विभाग ने इन्हें काटने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के सर्वेक्षण में इस नुकसान का आकलन किया गया है।
देहरादून वन प्रभाग में होप्लो भृंग ने साल के पेड़ों को भीतर से खोखला कर दिया है। झझरा और मलहन पर्वतमाला में इस कीट का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा गया है। मंडल वन अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि संक्रमित पेड़ों को काटना ही बीमारी को नियंत्रित करने का एकमात्र उपाय है। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने का निर्णय लेना विभाग के लिए भी चुनौतीपूर्ण है।
वन विभाग ने प्रभावित पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय नोडल कार्यालय को भेज दिया है। उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद ही कार्रवाई शुरू होगी। अधिकारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर संक्रमित पेड़ों को समय पर नहीं हटाया गया तो स्वस्थ साल के वनों को भी खतरा हो सकता है।
एफआरआई के कीट विज्ञान प्रभाग की टीम ने देहरादून वन प्रभाग के साथ-साथ कालसी और मसूरी वन प्रभागों का निरीक्षण किया। टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन किया और संक्रमित पेड़ों की पहचान की। रिपोर्ट के आधार पर ही कटाई का फैसला लिया जा रहा है। एफआरआई की सिफारिश पर विभाग आगे बढ़ रहा है।
कालसी वन प्रभाग में स्थिति सबसे गंभीर है। यहां लगभग 6000 साल के पेड़ होप्लो भृंग से प्रभावित हैं। इनमें से 1800 पेड़ सूख चुके हैं या सूखने की कगार पर हैं। प्रभागीय वनाधिकारी मयंक गर्ग ने बताया कि इन 1800 पेड़ों को काटने के लिए वन संरक्षक कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि, मसूरी वन प्रभाग में अभी तक ऐसी कोई गंभीर स्थिति नहीं पाई गई है जहां पेड़ काटने की जरूरत हो। मंडल वन अधिकारी अमित कुमार ने इसकी पुष्टि की।
होप्लो भृंग साल के पेड़ों को विशेष रूप से नुकसान पहुंचाता है। यह कीट पेड़ की लकड़ी को अंदर से खाता है, जिससे पेड़ कमजोर होकर सूख जाते हैं। देहरादून, कालसी और आसपास के क्षेत्रों में इस प्रकोप ने वन विभाग को अलर्ट कर दिया है। अधिकारी अब केंद्र सरकार से अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि प्रभावित पेड़ों को हटाया जा सके और स्वस्थ वनों की रक्षा की जा सके।
देहरादून के साल वनों में होप्लो भृंग के प्रकोप ने स्थानीय पर्यावरण को नई चुनौती दी है। 25 हजार पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है। केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद वन विभाग त्वरित कार्रवाई करेगा और प्रभावित क्षेत्रों में नए पौधारोपण पर भी जोर देगा ताकि हरे-भरे वनों की निरंतरता बनी रहे।


