नैनीताल : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ता जा रहा है। जोशीमठ की तबाही भूलते ही तोता घाटी की दरारें सुर्खियां बनीं, और अब नैनीताल की हृदयस्थली—ऐतिहासिक माल रोड—पर मौत का साया मंडरा रहा है। ग्रैंड होटल के पास 50-60 फुट लंबी दरारें उभर आई हैं, सड़क एक फुट धंस चुकी है। लोक निर्माण विभाग ने लोअर माल रोड पर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं: अगर तत्काल स्थायी उपाय न हुए, तो यह पूरा इलाका झील में समा सकता है! पर्यटन सीजन शुरू होने से ठीक पहले यह संकट शहर की जानलेवा साबित हो सकता है।
नैनीताल की लाइफलाइन माल रोड, जो 1846 में ब्रिटिश काल में बनी थी, अब अपनी नींव खो रही है। ग्रैंड होटल के निकट HDFC बैंक के पास 20 मीटर का हिस्सा 3-4 इंच धंस गया है, और 200 मीटर ऊंची पहाड़ी पर 165 मीटर लंबा पैच 22 मीटर गहराई तक कमजोर हो चुका है। भारी बारिश के बाद यह नया संकट उभरा है, जबकि 2018 में इसी जगह 50 मीटर सड़क नैनी झील में समा गई थी। तब 5 महीने तक यातायात ठप रहा, लेकिन विभाग ने केवल डामर चढ़ाकर टाल दिया। अब अपर माल रोड पर वाहनों का दबाव बढ़ा है, जो और खतरा पैदा कर रहा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना ने बताया, “मरम्मत का काम 22 सितंबर से निर्धारित था, लेकिन दरारें पहले ही आ गईं। 15 सितंबर से ही इमरजेंसी मरम्मत शुरू हो गई है। सड़क पर यातायात पूरी तरह बंद है, और बिटुमेन से दरारें भरने का काम चल रहा है।” लेकिन स्थानीय निवासी सिब्बन लाल चिल्ला उठे, “2018 के बाद से विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। डामर चढ़ाकर लापरवाही की, अब दरारें पूरे माल रोड पर फैल रही हैं। पर्यटन सीजन में हजारों पर्यटक यहां घूमेंगे, एक छोटी चूक और पूरे शहर का बुरा हाल हो जाएगा!”
स्थानीयों का गुस्सा: “माल रोड मर रही है, सरकार सो रही है!”
नैनीताल के निवासियों में आक्रोश व्याप्त है। प्रमोद, एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, “भूस्खलन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। माल रोड के किनारे बनी दुकानें, होटल और घर सब खतरे में हैं। 200 मीटर दूर भूस्खलन हो चुका है, फिर भी विभाग अस्थायी पैचवर्क कर रहा। अगर यही चला, तो नैनी झील में माल रोड का पूरा हिस्सा गिर जाएगा!” अल्माकोटेज क्षेत्र में सड़क की दीवार पर दरारें घरों को लीलने को बेताब हैं। वॉर्ड सदस्य जीनू पांडे ने इसे “लाइफ-थ्रेटनिंग सिचुएशन” बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
जिला मजिस्ट्रेट वंदना सिंह ने केंद्रीय टीम के निरीक्षण के बाद कहा, “माल रोड, हल्द्वानी, भवाली रोड समेत आसपास के भूस्खलन की रिपोर्ट केंद्र को भेजी गई है। बजट की मांग की है, लेकिन फिलहाल अस्थायी मजबूती का काम चल रहा।” एसडीएम नवाजिश खलीक ने बताया कि दीवार की स्थायी मरम्मत के लिए सर्वे चल रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि राजभवन से ऊपर का इलाका भी खतरे में है, और निर्माण कार्य तुरंत रोकना चाहिए।
ऐतिहासिक धरोहर पर संकट: पर्यटन उद्योग की कमर टूटने को
माल रोड केवल सड़क नहीं, नैनीताल की धड़कन है। यह मल्लीताल और तल्लीताल को जोड़ती है, और पर्यटकों के लिए नैनी झील के किनारे टहलने का स्वर्ग। गोविंद बल्लभ पंत रोड के नाम से मशहूर यह मार्ग उत्तराखंड के पर्यटन का केंद्र है। लेकिन लगातार भूस्खलन—जैसे 1867 और 1880 के हादसे—इसकी कमजोरी बयां करते हैं। आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट के मुताबिक, झील के आसपास का इलाका भूगर्भीय रूप से अस्थिर है। मानवीय गतिविधियां—नई इमारतें, नाले बंद होना—इस खतरे को बढ़ा रही हैं।
पर्यटन सीजन नजदीक आते ही दहशत है। “हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन अगर माल रोड बंद रही, तो होटल, दुकानें सब तबाह हो जाएंगी,” कहते हैं स्थानीय व्यापारी। फतेहपुर-बसानी जैसे इलाकों में नई सड़कें भी हर मानसून में धंस रही हैं, गांव कट जाते हैं। पिथौरागढ़ में भूस्खलन से आदि कैलाश यात्रा रुक चुकी है। विशेषज्ञ चेताते हैं: “नैनीताल प्रकृति का स्वर्ग है, लेकिन मानवीय लापरवाही इसे त्रासदी में बदल देगी।”
क्या होगा अगला कदम? केंद्र से उम्मीदें, लेकिन समय कम
केंद्र सरकार से बजट की मांग की गई है, लेकिन देरी घातक साबित हो सकती है। हाईकोर्ट ने 2018 में ही उच्च स्तरीय समिति गठित की थी, लेकिन सात साल बाद भी स्थायी समाधान नहीं। स्थानीयों ने धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है। प्रशासन ने अपील की: “सावधानी बरतें, संदिग्ध दरारें देखें तो तुरंत सूचना दें।” लेकिन सवाल वही: क्या उत्तराखंड के ये खूबसूरत पहाड़ अब मौत के मुहाने पर हैं? माल रोड का भविष्य लटका है—एक गलती, और नैनीताल की पहचान मिट्टी में मिल जाएगी!

