Sunday, February 8, 2026
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अल्मोड़ा वन विभाग ने पौधारोपण पर किये करोड़ों खर्च, फिर भी हरियाली ग़ायब

अल्मोड़ा। धरती को हरा-भरा करने के लिए वन विभाग हर साल लाखों रुपये की लागत से लाखों पौधे रोपता है, लेकिन इसके बावजूद जंगलों में अपेक्षित हरियाली नहीं दिख रही है। पिछले पांच वर्षों में विभिन्न प्रजातियों के 13.86 लाख से अधिक पौधे रोपे गए, जिन पर करीब 5.37 करोड़ रुपये खर्च हुए, फिर भी वनों में सघन हरियाली का अभाव है। अब पौधरोपण के बाद इन पौधों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

सिविल सोयम वन प्रभाग की स्थिति

सिविल सोयम वन प्रभाग के लमगड़ा, चौबटिया, गणानाथ, कोसी, मृग विहार, बिनसर, जागेश्वर और कनारीछीना रेंजों में कुल 3,65,668 पौधे रोपे गए। इन पौधों के रोपण पर 1,63,65,032 रुपये खर्च किए गए। साल-दर-साल आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 2020: 60,000 पौधे, 34,96,800 रुपये

  • 2021: 1,11,000 पौधे, 50,70,360 रुपये

  • 2022: 1,44,088 पौधे, 78,67,800 रुपये

  • 2023: 33,580 पौधे, 20,28,144 रुपये

  • 2024: 17,000 पौधे, 10,49,040 रुपये

अल्मोड़ा वन प्रभाग की स्थिति

अल्मोड़ा वन प्रभाग के सोमेश्वर, अल्मोड़ा, जौरासी, द्वाराहाट, मोहान और रानीखेत रेंजों में कुल 10,19,999 पौधे रोपे गए, जिन पर 3,73,80,792 रुपये खर्च हुए। साल-दर-साल आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 2020: 3,61,342 पौधे, 1,21,33,896 रुपये

  • 2021: 1,39,000 पौधे, 48,95,520 रुपये

  • 2022: 2,52,280 पौधे, 87,76,968 रुपये

  • 2023: 2,43,350 पौधे, 93,01,488 रुपये

  • 2024: 24,027 पौधे, 22,72,920 रुपये

जंगल क्यों नहीं बन रहे?

इतनी बड़ी संख्या में पौधरोपण के बावजूद जंगल सघन नहीं हो रहे हैं। जिस गति से वन विभाग पौधरोपण कर रहा है, उस हिसाब से अब तक कई घने जंगल तैयार हो जाने चाहिए थे। लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयान करती है। पौधों की सुरक्षा और देखभाल की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

वन विभाग का पक्ष

प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा, ध्रुव सिंह मर्तोलिया ने कहा, “वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए वन विभाग लगातार प्रयासरत है। रेंज अधिकारियों को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। जंगलों के संरक्षण में ग्रामीणों का सहयोग भी अपेक्षित है।”

पौधरोपण के साथ-साथ इनकी देखभाल और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। बिना उचित रखरखाव के लाखों रुपये की लागत से रोपे गए पौधे बेकार जा रहे हैं। वन विभाग को न केवल पौधरोपण बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि अल्मोड़ा की धरती फिर से हरी-भरी हो सके।

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