Sunday, February 8, 2026
HomeNewsपरेड ग्राउंड के साइकिल ट्रैक में दरारें पड़ने से सतह उखड़ने लगी

परेड ग्राउंड के साइकिल ट्रैक में दरारें पड़ने से सतह उखड़ने लगी

देहरादून: राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक और लोकप्रिय परेड ग्राउंड में स्मार्ट सिटी और एमडीडीए के तहत विकसित साइकिल ट्रैक तथा वॉकिंग पाथ अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुए कि जगह-जगह दरारें पड़ने और सतह उखड़ने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। करीब 20 करोड़ रुपये (कुछ सूत्रों के अनुसार स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कुल सौंदर्यीकरण पर 14-15 करोड़ खर्च) से ज्यादा की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लग रहे हैं। सुबह-शाम व्यायाम, जॉगिंग और साइकिलिंग के लिए आने वाले सैकड़ों नागरिक निराश हैं और इसे सरकारी धन की बर्बादी बता रहे हैं।

परेड ग्राउंड देहरादून की शान है। ब्रिटिश काल से चला आ रहा यह मैदान शहर का सबसे बड़ा ओपन स्पेस है, जहां रोजाना हजारों लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए आते हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत यहां साइकिल ट्रैक, रबराइज्ड वॉकिंग पाथ, ओपन जिम, बच्चों के खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, परेड ग्राउंड के सौंदर्यीकरण पर अब तक लगभग 14.58 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि कुल प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत इससे अधिक बताई जाती है। 2023-2024 में कार्य पूरा होने का दावा किया गया था, लेकिन बारिश के मौसम में ही ट्रैक पर दरारें और पिटिंग की समस्या सामने आई थी। हिंदुस्तान समाचार के अनुसार, स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद ट्रैक की मरम्मत भी करवाई थी।

हालांकि, नागरिकों का कहना है कि मरम्मत के बावजूद समस्या जस की तस है। ट्रैक की सतह असमान हो गई है, जगह-जगह सीमेंट और रबर उखड़ रहा है। साइकिलिस्टों के लिए यह जोखिम भरा बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे भूकंप संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री जरूरी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में रबराइज्ड या सिंथेटिक ट्रैक की तकनीक अपनाई जाती है, लेकिन रखरखाव और मौसम की अनदेखी से ऐसी समस्याएं आती हैं। 2024 में देहरादून में पहला सिंथेटिक साइकिलिंग ट्रैक बनने की खबरें आई थीं, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल उठे।

नागरिकों की मांग है कि एमडीडीए और स्मार्ट सिटी अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र जांच करवाई जाए। ठेकेदार से जवाबदेही तय हो और ट्रैक को उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री से दोबारा बनवाया जाए। परेड ग्राउंड का रखरखाव अब एमडीडीए के पास है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारी शीघ्र संज्ञान लेंगे।

यह मामला केवल एक ट्रैक का नहीं, बल्कि सरकारी प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो शहर की यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा बेकार हो जाएगी। नागरिक संगठन भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

RELATED ARTICLES