Sunday, February 8, 2026
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उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटाले में मुख्यमंत्री ने SIT जांच के आदेश दिए

देहरादून: उत्तराखंड में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर पंजीकृत संस्थाओं द्वारा की गई अनियमितताओं और फर्जी दस्तावेजों के जरिए छात्रवृत्ति राशि के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

92 संस्थाएं संदेह के घेरे में, 17 में गबन की पुष्टि

केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 2021-22 और 2022-23 सत्र के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड की कुल 92 संस्थाएं संदेह के घेरे में हैं। इनमें से 17 संस्थाओं के खिलाफ प्राथमिक जांच में छात्रवृत्ति गबन की पुष्टि हो चुकी है। इन संस्थाओं में छात्रों की संख्या, पहचान पत्र (आधार कार्ड) और निवास संबंधी दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल और रुद्रप्रयाग में वासुकेदार संस्कृत महाविद्यालय जैसे संस्थानों में भी अनियमितता मिली है। नैनीताल, हरिद्वार और अन्य जिलों की संस्थाएं भी जांच के दायरे में हैं।

मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “प्रदेश में छात्रवृत्ति जैसे कल्याणकारी कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा।” उनके निर्देश पर गठित एसआईटी इस मामले की गहराई से जांच करेगी और इसमें संलिप्त संस्थाओं के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाएगी। केंद्र सरकार ने इस संबंध में सात बिंदुओं पर जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें फर्जी मामलों की पहचान कर संबंधित के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना भी शामिल है।

सरस्वती शिशु मंदिर को ‘मदरसा’ दिखाकर घोटाला

उत्तराखंड में सामने आया यह नया छात्रवृत्ति घोटाला बेहद चौंकाने वाला है। इसमें सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल जैसे सामान्य विद्यालयों को कागजों में अल्पसंख्यक विद्यालय यानी ‘मदरसा’ दिखाकर छात्रवृत्ति ले ली गई है। 17 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा विद्यालयों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति में घोटाले की खबर सामने आने के बाद ही सीएम धामी ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। जांच की जिम्मेदारी विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, डॉ. पराग मधुकर धकाते को सौंपी गई थी।

ऐसे हुआ घोटाले का भंडाफोड़

ऊधम सिंह नगर जिले में वित्तीय वर्ष 2021-2022 और 2022-2023 के राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर दर्ज अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति आवेदकों के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए जिले के 796 बच्चों के दस्तावेजों का विवरण मांगा गया था। इनमें से 6 मदरसों में पढ़ने वाले 456 बच्चों के बारे में जानकारी संदिग्ध पाई गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि इन स्कूलों में सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल, किच्छा का नाम भी शामिल था, जिसका संचालक मोहम्मद शारिक-अतीक बताया गया है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल में दिखाया गया है कि यहां 154 मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं, जबकि सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय अल्पसंख्यक विद्यालय श्रेणी में नहीं आता है। इसी तरह काशीपुर के नेशनल अकादमी जेएमवाईआईएचएस में पढ़ने वाले 125 मुस्लिम छात्रों और उसके संचालक गुलशफा अंसारी, तथा मदरसा अल जामिया उल मदरिया के 27 बच्चों और उसके संचालक मोहम्मद फैजान का सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।

आगे की जांच जारी, 72 और कॉलेजों का सत्यापन

अल्पसंख्यकों की छात्रवृत्ति घोटाले में अब दूसरे दौर का सत्यापन शुरू होने जा रहा है। इसमें उत्तराखंड के 72 कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों का फिर से सत्यापन किया जाएगा। इससे पहले प्रदेश के 17 कॉलेजों में छात्रों की संख्या को लेकर फर्जीवाड़ा सामने आया था।

क्या है केंद्र की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना?

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना के तहत माइनॉरिटी के छात्रों को पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। इस योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक छात्रवृत्ति मिलती है, जिसमें प्रवेश शुल्क, पढ़ाई की फीस और भरण-पोषण भत्ता शामिल है। इसके अतिरिक्त, मान्यता प्राप्त संस्थानों में पढ़ रहे कक्षा 11 और उससे ऊपर की कक्षाओं के माइनॉरिटी छात्रों के लिए भी यह योजना शिक्षण शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य शैक्षणिक शुल्क उपलब्ध कराती है, जिससे छात्रों को पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

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