देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने आगामी बजट सत्र को ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित करने का फैसला लिया है। यह सत्र 9 से 13 मार्च 2026 तक चलेगा, यानी कुल 5 दिवसीय होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जो वित्त विभाग भी संभाल रहे हैं, 11 मार्च को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। सत्र की शुरुआत 9 मार्च को राज्यपाल गुरमीत सिंह के अभिभाषण से होगी, जबकि 13 मार्च तक विभिन्न चर्चाएं और बजट पारित होने की संभावना है। विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव धनंजय चतुर्वेदी द्वारा जारी अधिसूचना के बाद विधानसभा सचिवालय ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
यह निर्णय राज्य की जनभावनाओं और राज्य आंदोलन की विरासत को सम्मान देने वाला माना जा रहा है। गैरसैंण को लंबे समय से स्थायी राजधानी बनाने की मांग उठती रही है, लेकिन वर्तमान में इसे ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा प्राप्त है। सरकार ने जनता से जुड़ाव और पर्वतीय क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के लिए इस स्थान को चुना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले ही संकेत दिए थे कि बजट सत्र गैरसैंण में ही होगा, और अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद तिथियां अंतिम रूप से घोषित कर दी गई हैं।
गैरसैंण में विधानसभा सत्रों का इतिहास काफी पुराना है। राज्य आंदोलनकारियों की मांग को सम्मान देते हुए पहला विशेष सत्र 9 से 11 जून 2014 को टेंट में आयोजित किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे राज्य आंदोलन की भावनाओं का प्रतीक बनाया। इसके बाद 2015 में भी 2 से 3 नवंबर को टेंट में सत्र हुआ। स्थायी विधानसभा भवन के बनने के बाद पहला सत्र 17 से 18 नवंबर 2016 को आयोजित हुआ, जिसे तत्कालीन अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने ऐतिहासिक बताया था।
पिछले 12 वर्षों में गैरसैंण में कुल 35 दिनों तक सदन की कार्यवाही हो चुकी है। हालांकि, कुछ वर्षों में सत्र नहीं हुए, जैसे 2019 और 2022 में कोई सत्र गैरसैंण में नहीं आहूत किया गया। लेकिन अधिकांश बजट सत्र और महत्वपूर्ण सत्र यहां ही होते रहे हैं। यह स्थान राज्य की पहाड़ी पहचान और विकेंद्रीकरण की भावना को मजबूत करता है।
गैरसैंण में आयोजित प्रमुख विधानसभा सत्रों की सूची इस प्रकार है:
- 9 से 11 जून 2014: टेंट में विशेष सत्र (पहला सत्र)
- 2 से 3 नवंबर 2015: टेंट में सत्र
- 17 से 18 नवंबर 2016: स्थायी भवन में पहला सत्र
- 7 से 8 दिसंबर 2017: सत्र
- 20 से 26 मार्च 2018: बजट सत्र
- 2019: कोई सत्र नहीं
- 3 से 7 मार्च 2020: बजट सत्र
- 1 से 6 मार्च 2021: बजट सत्र
- 2022: कोई सत्र नहीं
- 13 से 16 मार्च 2023: बजट सत्र
- 21 से 23 अगस्त 2024: सत्र
- 19 से 20 अगस्त 2025: सत्र
अब 2026 का बजट सत्र भी इसी परंपरा को जारी रखेगा। इस सत्र को विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट होगा। पिछले वर्ष का बजट लगभग 1.01 लाख करोड़ रुपये का था, और इस बार इसे 1.15 से 1.20 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। सरकार युवा रोजगार, महिलाओं का सशक्तिकरण, पर्यटन विकास, बुनियादी ढांचा और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास पर फोकस कर सकती है।
विधानसभा सचिवालय के पास अब तक विधायकों से 500 से अधिक प्रश्न प्राप्त हो चुके हैं, और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है। विपक्ष, जिसमें कांग्रेस शामिल है, बेरोजगारी, पलायन, कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है, उनका कहना है कि बजट सत्र कम से कम 21 दिनों का होना चाहिए और सोमवार को भी कार्यवाही शामिल की जानी चाहिए, क्योंकि कई मुद्दे मुख्यमंत्री के विभागों से जुड़े होते हैं।
गैरसैंण का चुनाव राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा है। राज्य आंदोलन के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों को अलग राज्य और राजधानी के रूप में गैरसैंण की मांग प्रमुख थी। 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भराड़ीसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था। धामी सरकार ने भी इस परंपरा को बनाए रखा है, जिससे पर्वतीय जनता में सकारात्मक संदेश जाता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्णकालिक राजधानी बनाए जाने की मांग अभी भी बरकरार है, और सत्रों का आयोजन इस दिशा में एक कदम है।
विधानसभा सचिवालय ने सत्र की तैयारियां तेज कर दी हैं। भराड़ीसैंण विधानसभा भवन, जो चमोली जिले में स्थित है, ऊंचाई पर होने के कारण सर्दियों में ठंड बहुत होती है, लेकिन मार्च में मौसम अनुकूल रहता है। सत्र के दौरान सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह बजट सत्र राज्य की आर्थिक योजनाओं को आकार देने वाला होगा। सरकार समावेशी विकास, पर्यटन को बढ़ावा और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर जोर दे सकती है। साथ ही, विपक्ष के सवालों से सरकार की नीतियों की जांच भी होगी। गैरसैंण में सत्र आयोजित होना राज्य की पहाड़ी पहचान को मजबूत करने का प्रतीक है, और आने वाले दिनों में यहां सियासी गर्मी बढ़ने की उम्मीद है।

