देहरादून: उत्तराखंड सरकार ‘एक जिला एक मेडिकल कॉलेज’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में राज्य कैबिनेट ने राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर को 300 बेड के आधुनिक चिकित्सालय और 100 एमबीबीएस सीटों की मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय से तराई-भाबर क्षेत्र के साथ-साथ सीमांत और पर्वतीय जिलों के लाखों निवासियों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज न केवल इलाज का केंद्र बनेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों, आपदा प्रबंधन और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना 2026-27 सत्र से संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई वाली सरकार का मानना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और रोजगार—इन तीनों क्षेत्रों में राज्य को मजबूत आधार प्रदान करेगा। उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में स्थित यह कॉलेज 300 बेड के हॉस्पिटल के साथ शुरू होगा, जो क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित करेगा। मरीजों को जांच, उपचार और देखभाल की एकीकृत व्यवस्थाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी, जिससे इलाज की गुणवत्ता में निरंतर सुधार होगा। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में वर्तमान में 13 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 1,800 से अधिक एमबीबीएस सीटें हैं। रुद्रपुर कॉलेज से 100 नई सीटें जुड़ने से राज्य की चिकित्सा शिक्षा क्षमता में 5% की वृद्धि होगी।
इस कॉलेज की स्थापना से तराई-भाबर क्षेत्र के निवासियों को विशेष लाभ मिलेगा। रुद्रपुर औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां सिडकुल (स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) में सैकड़ों कारखाने हैं। यहां काम करने वाले श्रमिकों और कर्मचारियों को दुर्घटना या गंभीर बीमारी में तत्काल इलाज की सुविधा मिलेगी। 24×7 आपातकालीन सेवाओं से सड़क हादसों और जटिल मामलों में जीवन रक्षा संभव हो सकेगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की स्थायी उपलब्धता से मरीजों को दिल्ली या हल्द्वानी जैसे बड़े केंद्रों पर निर्भरता कम होगी, जिससे समय और धन की बचत के साथ-साथ बेहतर परिणाम सुनिश्चित होंगे।
पर्वतीय क्षेत्रों के लिए भी यह वरदान साबित होगा। सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी पर वर्तमान में बढ़ते मरीजों का दबाव कम होगा। टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, संक्रामक रोग नियंत्रण जैसे जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों को मजबूत करने में सहायता मिलेगी। आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी यह कॉलेज महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि उत्तराखंड भूकंप और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से ग्रस्त रहता है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की 2025 की सीट मैट्रिक्स रिपोर्ट के अनुसार, नए मेडिकल कॉलेजों से देशभर में 11,732 एमबीबीएस सीटें बढ़ी हैं, जिसमें उत्तराखंड का योगदान उल्लेखनीय है।
रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज से चिकित्सा शिक्षा को नया आयाम मिलेगा। हर साल 100 एमबीबीएस सीटों से उत्तराखंड और अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को अवसर प्राप्त होंगे। यह संस्थान राज्य को चिकित्सा शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक होगा। इसके साथ ही, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सिंग और प्रशासनिक कर्मियों के लिए हजारों रोजगार सृजित होंगे। इससे क्षेत्र में पलायन की समस्या कम होगी और स्थानीय युवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, नए कॉलेजों से 2025 में उत्तराखंड में 500 से अधिक नौकरियां पैदा हुई हैं।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, “एक जनपद-एक मेडिकल कॉलेज के लक्ष्य की ओर हम तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर का संचालन उत्तराखंड के स्वास्थ्य तंत्र को नई दिशा देगा। 300 बेड चिकित्सालय और 100 एमबीबीएस सीटों के साथ यह संस्थान गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने बताया कि कॉलेज का निर्माण कार्य अगले छह माह में शुरू हो जाएगा, और केंद्र सरकार से अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज है।
यह निर्णय उत्तराखंड के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होगा। पिछले 24 वर्षों में राज्य ने पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित किए हैं, जो स्वास्थ्य पहुंच को मजबूत कर रहे हैं। रुद्रपुर कॉलेज से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त होंगी, बल्कि आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा। सरकार का संकल्प है कि हर जिले में ऐसा ही केंद्र हो, ताकि कोई भी नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। आने वाले वर्षों में उत्तराखंड स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा।

