Thursday, February 19, 2026
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कैंची धाम में वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब हाईकोर्ट पहुँचा

नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बाबा नीब करौरी महाराज द्वारा स्थापित कैंची धाम में वित्तीय अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की और राज्य सरकार, डीएम नैनीताल, एसडीएम कैंची धाम तथा मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में मंदिर ट्रस्ट को जागेश्वर, बद्री-केदारनाथ मंदिर समिति की तर्ज पर सीमित सरकारी नियंत्रण में रखने की मांग की गई है।

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पिथौरागढ़ जिले के ग्राम बासीखेत निवासी ठाकुर सिंह डसीला ने मुख्य न्यायाधीश को चार पेज का पत्र भेजकर इन अनियमितताओं को उजागर किया। पत्र में कहा गया कि 1960 के दशक में स्थापित कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज की धार्मिक शिक्षाओं, संस्कारों और मानवता को समर्पित है। यहां वर्ष भर देश-विदेश के लाखों भक्त और दर्शनार्थी आते हैं, लेकिन ट्रस्ट के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है – न वेबसाइट पर, न अभिलेखों में और न ही मौखिक रूप से।

ट्रस्ट के संचालन एवं वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है। स्थानीय प्रशासन, तहसील कैंचीधाम, रजिस्ट्रार कार्यालय नैनीताल और जिलाधिकारी कार्यालय को भी ट्रस्ट का नाम पता नहीं है। मंदिर की आय एवं व्यय का कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाता। अधिकांश चढ़ावा नकद में आता है, और आरोप है कि ट्रस्टियों ने प्रबंधन को वित्तीय अनियमितताओं का केंद्र बना दिया है। करोड़ों-अरबों रुपये की भेंट को चोरी-छिपे ठिकाने लगाया जा रहा है। साथ ही, भक्तों के लिए पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अपर्याप्त हैं।

राज्य में धार्मिक ट्रस्टों का रजिस्ट्रेशन भारतीय ट्रस्ट अधिनियम-1882 के तहत होता है, लेकिन कैंची धाम ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन किस कार्यालय में हुआ, यह स्पष्ट नहीं है। नैनीताल रजिस्ट्रार कार्यालय ने अपने यहां किसी ऐसे ट्रस्ट के रजिस्ट्रेशन से अनभिज्ञता जताई है। ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन पूर्णतः संदेहास्पद बताया गया है, जहां नकद चढ़ावे का कोई पारदर्शी गणक नहीं है। सरकारी नियंत्रण की कमी से धर्म और आस्था के नाम पर लुका-छिपी का खेल चल रहा है। आरोप है कि मंदिर को कुछ लोगों द्वारा अघोषित लूट का केंद्र बनाया गया है। कुछ माह पूर्व ट्रस्ट ने 2.5 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए थे, लेकिन मंदिर संचालकों का अता-पता प्रशासनिक कार्यालयों में उपलब्ध नहीं है।

याचिकाकर्ता ने ट्रस्ट की ऑडिट रिपोर्ट, नाम दर्ज अचल संपत्ति, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दान की गई भूमि का विवरण सार्वजनिक करने तथा ट्रस्ट में भूमि दानकर्ताओं को ट्रस्टी बनाने की मांग की है। हाईकोर्ट का यह कदम कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार और ट्रस्ट से जवाब आने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

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