देहरादून : उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हर साल प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन वर्ष 2025 इस मामले में विशेष रूप से भयावह रहा है। अगस्त महीने में हुई मूसलाधार बारिश ने उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी सहित कई पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा जैसे हालात पैदा कर दिए। मैदानी क्षेत्रों में जलभराव ने जनजीवन को और भी मुश्किल बना दिया है। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने जहां जान-माल का भारी नुकसान किया, वहीं आपदाग्रस्त और जलभराव वाले क्षेत्रों में गंदगी के कारण महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
उत्तराखंड राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 1 अप्रैल से अब तक प्राकृतिक आपदाओं के कारण 80 लोगों की मौत हो चुकी है, 114 लोग घायल हैं, और 95 लोग अभी भी लापता हैं। मानवीय क्षति के साथ-साथ 88 बड़े पशु और 1481 छोटे पशुओं की भी हानि हुई है। आपदा ने 1828 मकानों को आंशिक रूप से और 71 मकानों को आधे से अधिक क्षतिग्रस्त कर दिया, जबकि 229 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
जलभराव और मलबे से फैली गंदगी के कारण टाइफाइड, हैजा, पीलिया जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। सचिवालय चिकित्सालय के डॉ. रविंद्र राणा ने बताया, “आपदाग्रस्त और जलभराव वाले क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक है। लोगों को साफ-सफाई, स्वच्छ पानी और हाइजीनिक भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों को गंदे पानी या मलबे में खेलने से रोकना जरूरी है।”
उत्तराखंड सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है। प्रदेश की 78 प्रभावित ग्राम सभाओं में से 65 में स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए जा चुके हैं, और शेष में अगले एक सप्ताह के भीतर शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में निःशुल्क चिकित्सा सुविधाएं, दवाइयां और स्वास्थ्य जांच उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, “आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम स्वास्थ्य सेवाएं उनके द्वार तक पहुंचा रहे हैं। जहां सड़कें टूटी हैं, वहां भी शिविर स्थापित किए जा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा, “हम आपदा को लेकर लगातार समीक्षा कर रहे हैं। जलभराव और आपदाग्रस्त क्षेत्रों में महामारी का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभाग इस दिशा में जरूरी कदम उठा रहे हैं। हम प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
स्वास्थ्य सावधानियां और विशेषज्ञों की सलाह
मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वच्छ पानी का उपयोग, साफ-सफाई और पौष्टिक भोजन इस दौरान बेहद जरूरी है। लोग बाहर का पानी पीने से बचें और घरों को साफ रखें। बच्चों को गंदे पानी या मलबे के संपर्क में आने से रोकना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उत्तराखंड सरकार और स्वास्थ्य विभाग आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में जुटे हैं। सड़कों और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए भी युद्धस्तर पर काम चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर उचित कदम उठाए गए, तो महामारी के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यह स्थिति न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयारी और जागरूकता जरूरी है। सरकार और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से ही इस चुनौती का सामना किया जा सकता है।

