पिथौरागढ़: आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने बड़ा कदम उठाया है। गुंजी और रोंगकोंग गांवों में इग्लू हट्स (Igloo Huts) का निर्माण तेजी से चल रहा है। ये हट्स बर्फ के टुकड़ों से बने गुंबदनुमा आकार के होंगे, जो -45 डिग्री तक के तापमान में भी अंदर गर्माहट प्रदान करेंगे। इससे पर्यटकों को बर्फीले पहाड़ों के बीच अनूठा, रोमांचक और स्मरणीय अनुभव मिलेगा। यह पहल उत्तराखंड पर्यटन को बढ़ावा देने वाली है, जहां सर्दियों में भी यात्रा संभव हो सकेगी।
ये हट्स बर्फ के टुकड़ों (Ice Bricks) से बने गुंबदाकार होंगे, जो तेज हवाओं को रोकेंगे और अंदर गर्मी बनाए रखेंगे। प्रत्येक हट में बेडरूम, बैठने की जगह और बेसिक सुविधाएं होंगी। गुंजी क्षेत्र में 6 और रोंगकोंग में 6 हट्स बनाए जा रहे हैं – कुल 12 इग्लू हट्स। प्रत्येक हट की लागत लगभग 40 लाख रुपये, कुल परियोजना लागत 4 करोड़ 80 लाख रुपये। हट्स विदेश से मंगवाए जा रहे हैं और तेजी से असेंबल किए जा रहे हैं।
ये हट्स समुद्र तल से 11,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर बन रहे हैं, जहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। पर्यटकों को बर्फीले माहौल में आरामदायक ठहराव मिलेगा। इससे आदि कैलाश, ज्योलिंगकांग, गुंजी, आसपास के क्षेत्रों में पहले से मौजूद सुविधाओं के साथ यात्रा साल भर चल सकेगी। गुंजी गांव, जो 3,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, यात्रा का प्रमुख आधार शिविर है, जहां से ओम पर्वत और आदि कैलाश की ओर रवाना हुआ जाता है। रोंगकोंग गांव, नाबी के पास स्थित, अपनी शांत वादियों और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है।
यात्रा को साल भर संभव बनाने की उम्मीद
केएमवीएन के एमडी विनीत तोमर ने बताया कि यात्रा को सुगम और आकर्षक बनाने के लिए ये इग्लू हट्स बनाए जा रहे हैं। “यह परियोजना न केवल पर्यटकों को अनोखा अनुभव देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी,” उन्होंने कहा। केएमवीएन के सहायक अभियंता अजय कुमार ने कहा कि गुंजी में 6 हट्स का काम शुरू हो चुका है, जबकि रोंगकोंग में भी निर्माण जारी है। यात्रा का सामान्य कार्यक्रम धारचूला से गुंजी, नाबीधांग, ज्योलिंगकांग तक है, जहां पर्यटक आदि कैलाश के दर्शन करते हैं।
यात्रा का महत्व
आदि कैलाश (भीमकुंड और पार्वती सरोवर के पास) और ओम पर्वत यात्रा आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित गुंजी और रोंगकोंग गांव समुद्र तल से 11,000-11,500 फीट ऊंचाई पर हैं। यहां शांति, हरियाली और बर्फीले पहाड़ों का अद्भुत संगम है। इग्लू हट्स से पर्यटकों को बर्फ में रहने का अद्भुत अनुभव मिलेगा, जो पहले संभव नहीं था। केएमवीएन द्वारा संचालित यह यात्रा 2025 में हजारों पर्यटकों को आकर्षित कर चुकी है, और नई सुविधाओं से 2026 में और वृद्धि की उम्मीद है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन का हब बनाएगी। यह परियोजना आदि कैलाश यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और आकर्षक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। पर्यटक अब सर्दियों में भी इस दिव्य यात्रा का आनंद ले सकेंगे! क्या यह उत्तराखंड पर्यटन की नई क्रांति बनेगी? समय बताएगा।

