Saturday, March 28, 2026
HomeNewsपहाड़ की पांच प्रमुख नदियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी में जुटा...

पहाड़ की पांच प्रमुख नदियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी में जुटा SARA

Dehradun, NTI: उत्तराखंड राज्य में जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पहले चरण में पांच प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन पर काम किया जाएगा। इस निर्णय की घोषणा ‘जलस्रोत नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा)’ की हालिया बैठक में की गई। इस पहल के तहत देहरादून-टिहरी की सौंग नदी, पौड़ी की पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियां, नैनीताल की शिप्रा नदी, और चंपावत की गौड़ी नदी को पुनर्जीवन के लिए चुना गया है। इन नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जा रही हैं।

प्राधिकरण के चेयरमैन IAS आनंद वर्धन  ने कहा कि सारा का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण उद्देश्य के साथ किया गया है। इससे जुड़े सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। सूखते जलस्रोतों, नदियों और जलधाराओं की पहचान तेजी से करते हुए उनके उपचार का कार्य आरंभ किया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, हर परियोजना के मूल्यांकन के लिए एक ठोस प्रणाली विकसित की जाएगी। राज्य और जिला स्तर पर प्राधिकरण के अंतर्गत होने वाले कार्यों के लिए वार्षिक लक्ष्य तय किए जाएंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष में जल संरक्षण कार्यों की कार्ययोजना एक महीने के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

5428 जलस्रोतों की पहचान

बैठक में सारा की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीना ग्रेवाल ने जल संरक्षण अभियान की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में उपचार के लिए 5428 जलस्रोतों को चिन्हित किया गया है।

83 जलस्रोतों का मास्टर प्लान

प्रदेश के 83 मुख्य जलस्रोतों के संवर्द्धन के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। वन विभाग, सिंचाई विभाग और जल निगम मिलकर इस दिशा में कार्य करेंगे। एजेंसियों ने मौजूदा समय में पानी की कमी को देखते हुए त्वरित कार्रवाई आरंभ कर दी है।

स्रोतों के सूखने के कारण

राज्य में जल स्रोतों के सूखने का सबसे बड़ा कारण पर्याप्त बारिश और बर्फबारी का न होना है। सितंबर 2023 से अब तक अपेक्षित मात्रा में वर्षा और हिमपात न होने के कारण इस साल गर्मियों में जल संकट गहराया। इस समस्या को समझने के लिए स्रोतों और गदेरों में पानी की स्थिति का आकलन किया गया। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार पानी की मात्रा में भारी गिरावट देखी गई।

प्रभावित जलस्रोत

आंकड़ों के अनुसार, 83 जलस्रोत ऐसे पाए गए हैं, जहां पानी की कमी अत्यधिक रही। इनमें से 53 स्रोत वन भूमि में, 26 राजस्व भूमि में और 4 अन्य क्षेत्रों में स्थित हैं।

  • प्रभाव के प्रमुख कारण:
    • तीन जलस्रोत रेल लाइन के निर्माण कार्यों से प्रभावित हुए।
    • दो जलस्रोत सड़क निर्माण के कारण क्षतिग्रस्त हुए।
    • 40 जलस्रोत कम बारिश और 38 अन्य मानवीय गतिविधियों से प्रभावित हुए।

पेयजल संकट

इस बार के गर्मी के मौसम में 477 पेयजल स्रोतों में पानी की कमी दर्ज की गई। इस कारण जल संस्थान के पेयजल आपूर्ति तंत्र को बड़ा नुकसान हुआ। देहरादून सहित सभी जिलों में पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं।

पुनर्भरण और समाधान

इस जल संकट को हल करने के लिए स्रोतों और गदेरों को दोबारा रिचार्ज करने का कार्य किया जाएगा। 83 प्रमुख स्रोतों पर आधारित 61 पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पुनर्जीवित किया जाएगा।

उत्तराखंड में जल संरक्षण और नदियों के पुनर्जीवन की यह पहल न केवल वर्तमान जल संकट का समाधान करेगी, बल्कि भविष्य में राज्य को जल संपन्न बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। यह अभियान अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करेगा।

RELATED ARTICLES