गोपेश्वर (चमोली): उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन सीमा से सटे नीती घाटी के टिम्मरसैंण महादेव गुफा, जिसे बाबा बर्फानी के नाम से जाना जाता है, को पर्यटन और तीर्थाटन का प्रमुख केंद्र बनाने की कवायद तेज हो गई है। पर्यटन विभाग ने इस पावन स्थल तक पहुंच सुगम बनाने के लिए 26.85 करोड़ रुपये की लागत से डेढ़ किलोमीटर लंबा ट्रेक, टिन शेड और 40 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। साथ ही, गुफा के आसपास सुंदरीकरण का कार्य भी जोरों पर है। सरकार की मंशा इस गुफा को धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़कर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है, जहां शीतकाल में बर्फ के पांच से सात शिवलिंग प्रकृति का कमाल रचते हैं। जिला पर्यटन अधिकारी अरविंद गौड़ ने बताया, “विभाग ने वृहद कार्ययोजना तैयार की है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। यह परियोजना न केवल आस्था को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन में भी मील का पत्थर साबित होगी।”
नीती घाटी, जो देश का सबसे ऊंचा गांव नीती (3,800 मीटर ऊंचाई) के लिए प्रसिद्ध है, हिमालय की गोद में बसी एक रहस्यमयी वादी है। यहां की टिम्मरसैंण महादेव गुफा, जो नीती गांव से मात्र डेढ़ किलोमीटर की पैदल दूरी पर स्थित है, सदियों से स्थानीय निवासियों की आस्था का केंद्र रही है। मान्यता है कि इस गुफा में भगवान शिव ने तपस्या की थी, और शीत ऋतु में यहां बर्फ के शिवलिंग प्रकट होते हैं, जो बाबा बर्फानी के दर्शन का प्रतीक हैं। गुफा की लंबाई लगभग 50 मीटर है, और इसमें लगातार पानी की बूंदें टपकती रहती हैं, जो शिवलिंग को और पवित्र बनाती हैं। फरवरी से अप्रैल के बीच, जब घाटी में बर्फबारी चरम पर होती है, तो पांच से सात बर्फ के शिवलिंग आकार लेते हैं। इस दौरान स्थानीय लोग निचले इलाकों में ऋतुवास के लिए चले जाते हैं, और गुफा की पूजा-अर्चना का दायित्व भारतीय सेना और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के जवानों पर होता है। इन वीर सैनिकों की निष्ठा ही इस पावन स्थल की रक्षा करती है।
क्षेत्रीय इतिहासकारों के अनुसार, टिम्मरसैंण गुफा का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जहां इसे शिव का ध्यान स्थल बताया गया है। पीढ़ियों से गढ़वाल के निवासी यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं, लेकिन दुर्गमता और मौसमी बाधाओं के कारण यह स्थल राष्ट्रीय स्तर पर कम ही जाना जाता है। पूर्व ज्योतिर्मठ प्रमुख प्रकाश रावत ने कहा, “क्षेत्र के लोग इस गुफा से गहराई से जुड़े हैं, लेकिन विधिवत यात्रा का अभाव एक बड़ी कमी रहा है। यदि ज्योतिर्मठ-नीती हाईवे को वर्ष भर सुचारु रखा जाए, तो फरवरी-अप्रैल में बाबा बर्फानी यात्रा संभव हो सकती है। इससे पर्यटन और तीर्थाटन को नए आयाम मिलेंगे, साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।” रावत का यह बयान क्षेत्र की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है, जहां पर्यटन से जुड़े कार्यों से सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, गुफा तक पहुंचने वाले ट्रेक को मजबूत पथरीले रास्ते में बदल दिया जाएगा, जिसमें सीढ़ियां, रेलिंग और आरामदायक पड़ाव शामिल होंगे। टिन शेड्स श्रद्धालुओं को ठंड और बारिश से बचाव प्रदान करेंगे, जबकि पार्किंग स्थल से वाहनों की भीड़भाड़ कम होगी। सुंदरीकरण कार्य में गुफा के प्रवेश द्वार को आकर्षक बनाने, आसपास हरियाली बढ़ाने और स्वच्छता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि यह स्थल बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम यात्रा के सर्किट का हिस्सा बने, ताकि ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रियों को शीतकालीन आस्था का अनुभव मिले। इसके अलावा, गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम और स्थानीय हस्तशिल्प स्टॉल्स की व्यवस्था से आर्थिक चक्रवृद्धि होगी। चमोली जिले में पहले से ही जोशीमठ, आनंदाश्रम और हेमकुंड साहिब जैसे स्थल पर्यटकों को लुभाते हैं; टिम्मरसैंण का जुड़ना इस चेन को और मजबूत करेगा।
उत्तराखंड सरकार की पर्यटन नीति 2025 के अनुरूप, यह परियोजना इको-फ्रेंडली विकास पर केंद्रित है। निर्माण में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दी जा रही है, और पर्यावरण संरक्षण के लिए वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। नीती घाटी, जो सीमा क्षेत्र होने के कारण रणनीतिक महत्व रखती है, पर्यटन से सैन्य-नागरिक एकीकरण को भी बढ़ावा देगी। सैनिक परिवारों के लिए विशेष दर्शन पैकेज और सांस्कृतिक आयोजन की योजना है, जो सेना के योगदान को सम्मानित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विकास से 2026-27 में ही 50,000 से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच सकते हैं, जिससे जिले की जीडीपी में 10-15 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है।
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ऊंचाई और कठोर मौसम के कारण निर्माण कार्य मौसमी खिड़कियों तक सीमित है, और भूस्खलन का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। बीआरओ द्वारा हाईवे के चौड़ीकरण और रखरखाव को तेज करने की मांग उठ रही है। फिर भी, विभागीय अधिकारी आश्वस्त हैं कि परियोजना समयबद्ध पूरी होगी। जिला पर्यटन अधिकारी गौड़ ने कहा, “बाबा बर्फानी परिवार के साथ दर्शन देते हैं; हमारा प्रयास है कि यह आस्था वैश्विक स्तर पर फैले।”
कुल मिलाकर, टिम्मरसैंण महादेव गुफा का यह सौंदर्यीकरण उत्तराखंड की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक पर्यटन को जोड़ेगा। नीती घाटी, जो कभी सैन्य चौकी तक सीमित थी, अब आस्था और साहस का प्रतीक बनेगी। स्थानीय निवासियों की उम्मीदें परवान चढ़ने वाली हैं, और बाबा बर्फानी के दर्शन अब दूरदराज के कोने तक पहुंचेंगे। यह न केवल आर्थिक उन्नति लाएगा, बल्कि हिमालय की गोद में शांति और समृद्धि का संदेश भी देगा।

