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कूड़ा -कचरे के कारोबार से मालामाल युवती ‘स्क्रैपशाला’

जो समान दूसरों के लिये कूड़ा है, उनके लिये वो काफी काम का होता है। लोग जिस समान को अपने घरों से यूं ही निकाल फेंकते हैं, वो उस समान को इकट्ठा कर कई लाजवाब चीजें तैयार करती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) से प्रभावित और पर्यावरण विज्ञान से मास्टर्स करने वाली शिखा शाह (Shikha Shah), अपने हुनर से ना केवल घाटों के शहर वाराणसी (Varanasi) की सफाई में अपना योगदान दे रहीं हैं बल्कि रोजमर्रा के कूड़े को नये-नये आकार देकर शहर की सुंदरता बढ़ाने का काम कर रही हैं। यही वजह है कि कूड़े से बनाये उनके उत्पाद की आज कई ई-कॉमर्स वेबसाइट में काफी डिमांड है।

यूपी के वाराणसी शहर (Varanasi city of Uttar Pradesh) में रहने वाली शिखा शाह (Shikha Shah) ने अपनी स्कूली पढ़ाई यहीं रहकर पूरी की। इसके बाद मास्टर्स करने के लिये वो दिल्ली आ गई। शिखा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एनवायरमेंट साइंस में पहले मास्टर्स (Masters in Environmental Sciences from Delhi University) किया और उसके बाद 2013 में उनका चयन ‘रिलांयस फाउंडेशन’ (Reliance Foundation) के लिए हो गया। इस दौरान उनको गांवों में काम करने का मौका मिला। काम करने के दौरान उन्होंने गांव की समस्याओं को काफी करीब से देखा और उनका किस तरह से समाधान निकाला जा सकता है इस पर काम किया। इस दौरान शिखा ने सोशल स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योरशिप (social startup and entrepreneurship) से जुड़े मुद्दे पर आईआईटी मद्रास (IIT Madras) में एक प्रेजेंटेशन दिया। हालांकि उनका ये स्टार्टअप कोई आकार नहीं ले पाया। बावजूद वहां पर अपने जैसे दूसरे लोगों से मिलकर उनको इस बात का आइडिया हो गया कि किस तरह से सोशल सेक्टर में अपना कारोबार शुरू किया जा सकता है।

ScrapShala worker on design

इसके बाद 2015 में शिखा अपने शहर वाराणसी (Varanasi) वापस आ गई। यहां पर काफी रिसर्च के बाद उन्होने फैसला किया कि वो वेस्ट मटेरियल के इस्तेमाल कर अपना स्टार्टअप शुरू करेंगी। दरअसल उन्होने बचपन से अपनी मां मधु शाह (Madhu Shah) को भी वेस्ट समान से कई खूबसूरत चीजों को बनाते हुए देखा था क्योंकि उनकी मां का मानना था कि लोगों को कम से कम कूड़ा फेंकना चाहिए। शिखा ने बताया कि

वाराणसी (Varanasi) एक पर्यटक स्थल है और देश-दुनिया से यहां पर कई सैलानी आते हैं, लेकिन देश भर में चल रहे स्वच्छ भारत अभियान [Swachh Bharat Abhiyan (English: Clean India Movement)] के बावजूद यहां पर आज भी जगह-जगह कूड़े के ढेर मौजूद हैं। वहीं मैंने सोचा कि क्यों ना अपने काम से एक ओर शहर को साफ सुथरा रखा जाये तो दूसरी ओर उसी कूड़े का इस्तेमाल कर उसे सही आकार दिया जाये।

इस तरह शिखा ने इस साल जनवरी में अपने स्टार्टअप ‘स्क्रैपशाला’ (ScrapShala) की शुरूआत की। शुरूआत में उन्होने अपने घर के आस पास के लोगों और जान पहचान के लोगों से बात कर उस कचरे को इकट्ठा किया जिसे लोग अक्सर यूं ही फेंक देते हैं। इसमें वेस्ट मटेरियल में प्लास्टिक, मैटेल, कांच और दूसरे सामान थे। धीरे-धीरे उन्हें वाराणसी के नगर निगम (Varanasi Municipal Corporation) से भी वेस्ट स्क्रैप (waste scrap) मिलने लगा। इस वेस्ट मटेरियल से वो कई तरह के साजो सामान बनाती हैं। जिनका इस्तेमाल घर, कॉरपोरेट, रोजमर्रा से जुड़ी चीजें और उपहार देने में किया जाता है।

ScrapShala worker doing his job

इस समय शिखा शाह (Shikha Shah) ‘स्क्रैपशाला’ (ScrapShala) को एक तीन मंजिला इमारत से चला रही हैं। शिखा ने इस स्टार्टअप की शुरूआत अपनी दोस्त कीर्ति सिंह के साथ की थी, जो अब अपना पूरा वक्त इस काम को ही दे रहीं हैं। इन दो दोस्तों के अलावा दस दूसरे लोग भी काम करते हैं। इन लोगों में कारपेंटर (carpenter), वेल्डर (welder), क्लीनर (cleaner), पेंटर (painter), बुनकर(weaver) प्रमुख हैं। अपने बनाये सामान को शिखा शाह (Shikha Shah) ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से बेच रही हैं। ऑनलाइन में वो अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी कई ई-कामर्स साइटों के जरिये अपने सामान को बेच रहीं हैं। इसके अलावा वाराणसी (Varanasi) और लखनऊ (Lucknow) के कई स्टोरों में यहां तक की ‘फैब इंडिया’ (Fab India) के स्टोरों में भी उनका सामान बिकता है। वाराणसी (Varanasi) में तो उनके 200 से भी ज्यादा ऐसे  ग्राहक हैं जो उनसे बार बार सामान खरीदते हैं। एक साल में ही शिखा करीब 70 हजार रुपये का सामान बेच चुकी हैं। जिसे लोगों ने कचरा समझ कर यूं ही फेंक दिया था। वाराणसी में उनके सामान को खरीदने वालों में काफी विदेशी सैलानी भी होते हैं। शिखा बताती हैं कि

विदेशी लोग हमारे बने सामानों को ना सिर्फ खरीदते हैं, बल्कि वो इन्हें देखकर आकर्षित भी होते हैं क्योंकि वो लोग वेस्ट मटेरियल के प्रति हमसे बहुत ज्यादा जागरूक हैं।

‘स्क्रैपशाला’ (ScrapShala) के बने सामानों को बेचने के लिए शिखा कई प्रदर्शनियां भी लगातीं हैं। जिसके जरिये वो लोगों को ना केवल पर्यावरण के प्रति जागरूक करती हैं बल्कि उनको अपने बने सामानों की खूबियां भी गिनाती हैं। शिखा का मानना है कि भारत जैसे देश में वेस्ट मटेरियल से बने सामानों का बहुत बड़ा बाजार है। देश में इस क्षेत्र में काफी काम हो रहा है। हालांकि देश में कुल वेस्ट का केवल 4 प्रतिशत हिस्सा ही रिसाइकिल होता है। इस कारण इस क्षेत्र में काम की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। लोग अगर इस तरह के काम से जुड़ते हैं तो एक ओर पर्यावरण दूषित होने से बच जायेगा तो दूसरी ओर कई लोगों को इससे रोजगार भी मिलेगा। वहीं वेस्ट मटेरियल (waste material) से बने सामानों की दिन-ब-दिन मांग बढ़ती जा रही हैं क्योंकि धीरे-धीरे ही सही आज की युवा पीढ़ी भी इस ओर जागरूक हुई है और वो वेस्ट से बने सामानों से अपने घर और ऑफिस को सजाते हैं। थोड़े से वक्त में ही ‘स्क्रैपशाला’ (ScrapShala) के बने सामानों की देश में ही नहीं विदेशों में भी काफी मांग हैं। बावजूद शिखा का फिलहाल पूरा ध्यान अपने कारोबार को देश में ही फैलाने का है। इसके बाद ही वो दूसरे देशों की मांग को पूरा करने की कोशिश करेंगी।

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