बैंकों में फ्रॉड के बाद फ्रॉड की लम्बी लाइन

इन दिनों कुछ ही समय के अंतराल के दौरान एक के बाद एक सामने आने वाले अरबों रुपयों के बैंक घोटालों से देश के अर्थ जगत में भूचाल सा आया हुआ है जिससे बैंकों की विश्वसनीयता पर प्रश्रचिन्ह लग गया है। सबसे पहले पंजाब नैशनल बैंक का 11,400 करोड़ रुपए का ऋण घोटाला सामने आया जो कुछ बैंकरों तथा सरकारी अधिकारियों के अनुसार 20,000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।

नीरव मोदी के बैंक घोटाले के तुरंत बाद विक्रम कोठारी द्वारा बैंकों से 3695 करोड़ रुपए के फ्रॉड का मामला सामने आया और इसके बाद तो बैंक घोटाले उजागर होने की झड़ी-सी लग गई है तथा मात्र 1 सप्ताह में 4 बैंक घोटाले और सामने आ गए हैं। 21 फरवरी को बैंक आफ महाराष्ट्र ने व्यापारी अमित सिंगला और अन्य के विरुद्ध जाली दस्तावेजों के आधार पर 2010 और 2012 के बीच बैंक से नकद ऋण सुविधा के अंतर्गत 950 करोड़ रुपए ऋण लेने की शिकायत सी.बी.आई. में दर्ज करवाई।

अभियुक्तों ने ऋण लेने के लिए जमानत के रूप में पेश जिस सम्पत्ति की कीमत 18 करोड़ रुपए बताई थी, ऋण के नान परफाॄमग एसैट (एन.पी.ए.) में बदल जाने के बाद उस सम्पत्ति की कीमत मात्र 2.5 करोड़ रुपए पाई गई। 22 फरवरी को ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स (ओ.बी.सी.) ने करोल बाग, दिल्ली स्थित डायमंड ज्यूलरी निर्यात करने वाली फर्म द्वारका दास सेठ इंटरनैशनल तथा इसके मालिक सभ्या सेठ के विरुद्ध 389.85 करोड़ रुपए के बैंक ऋण फ्राड की शिकायत सी.बी.आई. में दर्ज करवाई। बैंक ने आरोप लगाया है कि उक्त कम्पनी ने ‘लैटर्स आफ क्रैडिट’ तथा अन्य ऋण सुविधाओं के अंतर्गत 2007 और 2012 के बीच गोल्ड ज्यूलरी के निर्यात/आयात के लिए ऋण लिया था परंतु लौटाने में नाकाम रही।

23 फरवरी को सी.बी.आई. ने पंजाब नैशनल बैंक की बाड़मेर शाखा में हुए एक और घोटाले पर केस दर्ज किया। सी.बी.आई. के अनुसार पी.एन.बी. की बाड़मेर शाखा में एक सीनियर ब्रांच मैनेजर ने सितम्बर, 2016 और मार्च, 2017 के बीच बेईमानी और धोखाधड़ी से आवेदकों के व्यापार या आवास का सत्यापन किए बिना 26 लोगों को मुद्रा ऋण बांटे जिससे बैंक को 62 लाख रुपए का नुक्सान हुआ। सी.बी.आई. ने इस मामले में पी.एन.बी. बाड़मेर शहर में तत्कालीन बैंक मैनेजर इंद्र चंद्र चंद्रावत के विरुद्ध केस दर्ज किया है। चंद्रावत पर यह भी आरोप है कि उसने 2011 में करीब 2 करोड़ रुपए का फ्रॉड किया था तथा बैंक ने एक आंतरिक जांच के बाद उसे सस्पैंड भी कर दिया था।

इसी दिन सी.बी.आई. ने ओ.बी.सी. को 97 करोड़ रुपए के ऋण नहीं चुकाने के मामले में सिंभोली शूगर लिमिटेड के सी.एम.डी. गुरमीत सिंह मान, डिप्टी एम.डी. गुरपाल सिंह और अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया है। एन.आई.ए. की रिपोर्ट के अनुसार सिंभोली शूगर लिमिटेड ने ओ.बी.सी. से 109.08 करोड़ रुपए का ऋण लिया है। सी.बी.आई. ने बैंक की शिकायत पर रविवार 25 फरवरी को कम्पनी के 8 ठिकानों पर छापामारी करने के बाद विस्तृत जांच शुरू कर दी है। विडम्बना ही है कि पंजाब नैशनल बैंक में 11,400 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने तक तो बैंक अधिकारी चुप बैठे रहे परंतु अब इसके बाद एक-एक करके बैंकों में धोखाधड़ी के मामले उजागर कर रहे हैं।

इस घटनाक्रम के परिणामस्वरूप देशवासियों में घबराहट भी व्याप्त है कि कहीं उनका पैसा डूब ही न जाए, परंतु उनके पास और कोई चारा भी नहीं है तथा उन्हें यह जोखिम सहन करना ही पड़ेगा। वैसे भी भारतीयों में सहनशक्ति बहुत है। इसी कारण पहले 600 वर्षों तक मुगलों तथा अन्य विदेशी आक्रांताओं ने और फिर 200 वर्षों तक अंग्रेजों ने लूटा परंतु भारत वासी इसे बर्दाश्त करते रहे। बहरहाल जहां वित्त मंत्री अरुण जेतली ने बैंकों से धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है जिससे बचे-खुचे घोटाले भी बाहर निकलेंगे, वहीं घोटालों का उजागर होना अच्छी बात है ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिले और बैंकों की कार्यप्रणाली में शुचिता आ सके। सरकार को भी इस सारे मामले में संज्ञान लेकर लोगों का भय दूर करने के लिए बयान देना चाहिए कि बैंकों में उनकी रकम सुरक्षित है और उसे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

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