क्यों चीन ने मानसरोवर झील में नहाने से किया मना

मानसरोवर पवित्र झील में हिंदू सदियों से डुबकी लगाते रहे हैं. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इस झील में नहाने से सभी पाप धुल जाते हैं. लेकिन इस बार चीन की सख्ती ने हिंदू तीर्थ यात्रियों को झील में डुबकी नहीं लगाने दी. लोगों को बाल्टी में पानी लेकर झील से बाहर स्नान करने दे गया.

15 हजार फीट की ऊंचाई में मौजूद मानसरोवर झील हिंदुओं की आस्था का केंद्र है. 320 वर्ग किलोमीटर में फैली इस झील में सदियों से सनातनी डुबकी लगाकर खुद को पवित्र करते आए हैं. 1962 के चीनी आक्रमण के बाद यहां स्वतंत्र आवाजाही पर पूरी तरह रोक थी. लेकिन दोनों मुल्कों के बीच वार्ता के बाद 1982 से मानसरोवर यात्रा शुरू हुई. तब से हिंदू तीर्थ यात्री हर साल मानसरोवर के झील में डुबकी लगाते आए हैं. लेकिन इस साल चाइना सरकार ने पर्यावरण का हवाला देते हुए डुबकी पर पूरी तरह रोक लगा दी.

चाइना के नए फरमान के बाद इस बार तीर्थ यात्रियों ने बाल्टी में पानी लेकर मग से स्नान किया. चाइना सरकार का मानना है कि डुबकी लगाने से जहां मानसरोवर झील गंदी हो रही है, वहीं डूबकर कइयों की मौत भी हो चुकी है. कुछ भारतीय तीर्थ यात्रियों को भले ही ये फरमान अटपटा लगा हो. लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे खूब सराहा है.

मानसरोवर झील को बचाने के लिए चाइना के इस कदम से संवेदनशील तीर्थ यात्री खासे उत्साहित हैं. आलम ये है कि कइयों ने चीन की तर्ज पर गंगा में भी स्नान के लिए कड़े कानून की वकालत की है ताकि हमारी जीवनदायिनी नदियां पूरी तरह साफ रह सकें.

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