उत्तराखंड STF ने किया 250 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा

देहरादून: उत्तराखंड STF ने 250 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा किया है. पावर बैंक नामक एप के माध्यम से ये साइबर ठग 15 दिन में पैसे डबल करने का लालच देते थे. एडीजी अभिनव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसका खुलासा किया है. विदेशी व्यापारियों द्वारा भारत के बैंक खातों के माध्यम से की जा रही धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया गया.

पैसे डबल करने का लालच

साइबर ठग लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने के लिए 15 दिन में पैसे डबल करने का लालच देते थे. पीड़ित रोहित कुमार की शिकायत पर STF ने ये बड़ी कार्रवाई की है. अब तक ये जालसाज पावर बैंक नामक एप के माध्यम से करीब 250 करोड़ की साइबर ठगी को अंजाम दे चुके थे. मुख्य अभियुक्त पवन कुमार पांडेय को STF ने नोएडा सेक्टर-99 से गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से 19 लैपटॉप, 592 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 4 एटीएम और 1 पासपोर्ट बरामद हुई हैं.

ऑनलाइन धोखाधड़ी का पर्दाफाश

एसटीएफ की टीम ने विदेशी व्यापारियों द्वारा भारत के बैंक खातों के माध्यम से की जा रही ऑनलाइन धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया. आरोप है कि ये साइबर ठग आम जनता को गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) पर मौजूद पावर बैंक नामक एप में निवेश कर पैसे दोगुना करने का लालच देते थे. वहीं, मामले में एसटीएफ ने ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सदस्य पवन कुमार पांडेय को नोएडा से गिरफ्तार किया है.

पावर बैंक एप के जरिए धोखाधड़ी

बताया जा रहा है कि यह धोखाधड़ी देश की सबसे बड़ी साइबर धोखाधड़ी है. पावर बैंक एप फरवरी 2021 से 12 मई 2021 तक संचालन में रही, जिसमें साइबर थाने द्वारा वित्तीय लेनदेन का अध्ययन किया गया तो विभिन्न खातों में करीब 250 करोड़ धनराशि की धोखाधड़ी सामने आई है. गौरतलब है कि इस एप को संभावित 50 लाख लोगों द्वारा पूरे भारतर्ष में डाउनलोड किया गया है.

रोहित की शिकायत में मामले का हुआ खुलासा

साइबर अपराधियों द्वारा पावर बैंक नामक एप के माध्यम से पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन मे पैसे दोगुने करने का लालच देकर आम जनता से धनराशि जमा कराकर करोड़ो रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे. इस क्रम में एक प्रकरण साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को मिला, जिसमें पीड़ित रोहित कुमार निवासी श्यामपुर जनपद हरिद्वार ने शिकायत दर्ज कराई. उसने बताया कि उसके दोस्त ने कहा कि पावर बैंक एप के माध्यम से पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन मे पैसे दोगुने हो जाते है. उसकी बातों मे आकर पीड़ित ने पावर बैंक नामक ऐप पर भिन्न भिन्न तरीको से 91,200 और 73,000 हजार रुपये जमा कराकर, उसके साथ धोखाधड़ी की गयी.

STF और साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

पीड़ितों की तहरीर पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में आइटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए STF और साइबर थाने की संयुक्त टीम का गठन किया गया. इस तरह का मामला जनपद टिहरी में भी एक मुकदमा पंजीकृत है. पुलिस टीम ने आरोपियों द्वारा प्रयोग किये गए मोबाइल नंबर और पीड़ित से धनराशि जिन बैक खातों और ऑनलाईन मर्चेंट या वॉलेट में प्राप्त की गयी, उनकी संबंधित दूरभाष कंपनी, बैक और वॉलेट नोडल अधिकारियों से जानकारी की ली.

RAZORPAY और PAYU से पैसों का ट्रांसफर

जानकारी करने पर पता चला कि सभी धनराशि विभिन्न वॉलेट के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातो में भेजी जा रही थी. RAZORPAY और PAYU के माध्यम से पैसा ICICI बैंक के खाते और पेटीएम बैंक में ट्रांसफर कराये गये. साथ ही यह भी पता चला कि प्रतिदिन करोड़ो का लेन देन बैंक खातों में किया जाता है. साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन द्वारा इन खातो का तकनीकी जांच करने पर पता चला कि पेटीएम बैंक का खाता प्रमुख संदिग्ध खाता है. जिसका संचालन पवन कुमार पाण्डेय निवासी नोयडा उप्र के द्वारा किया जा रहा है.

मुख्य सरगना पवन कुमार पांडेय गिरफ्तार

साइबर थाना और एसटीएफ की संयुक्त टीम का गठन किया गया. आरोपियों की गिरफ्तारी के टीम को लिए उप्र, दिल्ली एनसीआर के लिए रवाना किया गया. STF और साइबर क्राइम पुलिस टीम ने ठगी करने वाले संगठित गिरोह के सदस्य पवन कुमार को नोयडा सेक्टर-99 से गिरफ्तार किया. आरोपी के कब्जे से 19 लैपटॉप, 592 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 4 एटीएम कार्ड और एक पासपोर्ट बरामद किया गया है. मामले में आरोपी के खिलाफ धारा 3/21, 4/22 Banning of unregulated deposit Scheme act 2019 का मुकदमा दर्ज किया गया.

निवेशकों को कमीशन का लालच

कुछ विदेशी बिजनेसमैन भारत में कुछ निवेशकों से दोस्ती कर उनको विभिन्न व्यापार के नाम पर अपने साथ कमीशन देने के नाम पर जोड़ते हैं. इसी तरह इस मुकदमे में सामने आया कि इस प्रकार विभिन्न ऑनलाइन एप पूर्व में लोन प्रदान करती थी. अब अपराध के तरीके मे बदलाव कर ये लोगों का विश्वास जीतकर रिचार्ज और पैसा दोगुना करने का प्रलोभन देकर धनराशि निवेश करवाते हैं.

भारतीय बैंक खाता और सिम का उपयोग

इस धोखाधड़ी के लिए भारतीय नागरिकों का ही बैंक खाता और उनका मोबाइल नंबर का प्रयोग किया जाता है. शुरू में कुछ व्यक्तियों को पैसे वापस भी किये जाते है, जिससे सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार प्रसार से इनका यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध पूरे देश में पैर पसार सकें. प्रतिदिन करोड़ों धनराशि एक खाते से दूसरे खाते और उसके आगे विभिन्न खातो में ट्रांसफर कराकर पुलिस को भ्रमित करने का प्रयास करते है. अपराध में प्रयोग बैंक खाते विभिन्न फर्जी कम्पनियों के नाम से रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी (Registrar of Companies) में पंजीकृत है.

25 संदिग्ध एप की सूची

इसी प्रकार 25 एप जो संदिग्ध कार्य में लगी है, उनकी सूची प्राप्त हुई है. यह भी पाया गया कि इस धनराशि को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर यह चीन और अन्य राष्ट्रों में भेजी जा रही हैं. जहां इसको स्थानीय मुद्रा में बदल दिया जाता है. इस प्रकार भारत के पैसे को अन्य राष्ट्र की मुद्रा में परिवर्तित करने का एक बहुत बड़ा संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह चल रहा है. इस तरह के मामले में 20 अन्य शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच की जा रही है.

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