राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सरकार पर लगाये गंभीर आरोप

सरकार पर बेहद गंभीर आरोप
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने मुख्यमंत्री व शहरी विकास मंत्री पर कई सवाल उठाए हुये कहा कि सरकार ने चुनाव की पूरी तैयारी नहीं हो पाई है। अभी तक न ही परिसीमन पर स्थिति साफ है और न ही आरक्षण की स्थिति। इसके साथ ही ईवीएम और वीवीपैट से चुनाव कराने के लिए आयोग ने सरकार से धनराशि मांगी थी जिसपर भी सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने सरकार पर तंज सकते हुये कहा कि आयोग ने सरकार ने 17 करोड़ मांगे थे लेकिन 17 रुपए भी अबतक नहीं मिले।
निर्वाचन आयोग पहुंचा कोर्ट
सरकार की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ अब निर्वाचन आयोग ने कोर्ट जाने का मन बनाया है। निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि 9 अप्रैल को आयोग ने चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आश्वासन दिया था लेकिन सरकार ने इसकी कोई तैयारी नहीं की। अगर 9 अप्रैल को अधिसूचना जारी होती तो 3 मई तक मतगणना हो जाती।

राज्य निर्वाचन आयुक्त के आरोप-

  • जुलाई 2017 में सीएम से मिलने का समय मांगा लेकिन उनसे कहा गया कि अगले रविवार आना लेकिन आजतक वो रविवार नहीं आया।
  • सीएम से जब मुलाकात नहीं हुई तो शहरी विकास मंत्री से मिली लेकिन मदन कौशिक भी कतई सीरियस नहीं दिखे।
  • आयोग ने सरकार ने 17 करोड़ मांगे थे लेकिन 17 रुपए भी अबतक नहीं मिले।
  • अभी तक न ही परिसीमन पर स्थिति साफ है और न ही आरक्षण की स्थिति।

सरकार की तैयारी पूरी नहीं
गौर हो कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में निर्धारित अधिसूचना जारी करने की डेडलाइन मंगलवार को निकल गई। राज्य निर्वाचन आयोग ने 9 मार्च को सरकार को प्रारंभिक चुनाव कार्यक्रम भेजते हुए दो अप्रैल तक सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी होने की डेडलाइन तय की थी, इसके बाद 3 अप्रैल को आयोग को चुनाव की अधिकारिक घोषणा करनी थी लेकिन मंगलवार शाम तक सरकार चुनावी अधिसूचना फाइनल कर आयोग को नहीं भेज पाई।

20 दिनों में नहीं हो सकते चुनाव
सरकार ने आयोग को 9 अप्रैल के बाद चुनाव कार्यक्रम जारी कर अप्रैल आखिर तक चुनाव कराने पर सहमत होने की जानकारी दी है, लेकिन आयोग का कहना है कि सीमा विस्तार के चलते इस बार मतदाताओं की संख्या 34 लाख से अधिक पहुंच रही है। इसलिए महज 20 दिनों में चुनाव कराना मुश्किल है।

चुनावी में देरी पक्का
बता दें कि 24 निकायों में सीमा विस्तार का प्रस्ताव अबतक फाइनल नहीं हो सका है। मंगलवार शाम को निदेशालय से सभी 24 निकायों में सीमा विस्तार का प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। अब शासन से एक दो दिन में सीमा विस्तार की अंतिम अधिसूचना जारी होगी। इधर, निदेशालय को अबतक सभी निकायों से ओबीसी आरक्षण के आंकड़े नहीं मिल पाए हैं। आरक्षण घोषित करने और आपत्तियों के निपटारे में सरकार को कम से कम 10 दिन चाहिएं। इस कारण चुनाव में अब देरी तय लग रही है।

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