अंतर्कलह से जूझ रही उत्तराखंड कांग्रेस

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के करीबी माने जाते रहे हैं. बताया जाता है कि किशोर उपाध्याय के अध्यक्ष रहने के दौरान जोत सिंह बिष्ट का पार्टी संगठन में काफी दबदबा होता था. लेकिन पासा पलटा और प्रीतम सिंह पीसीसी चीफ की कुर्सी पर काबिज हो गये. जिसके बाद से लगातार जोत सिंह बिष्ट शिकायती हो गये और धीरे-धीरे उन्होंने बागवती रूख अख्तियार कर लिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि जोत सिंह बिष्ट ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हो रही है।
वहीं कुछ दिनों पहले गुटबाजी का एक और नमूना सामने आया. जहां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर से विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने आलाकमान को अपने इस्तीफे तक की धमकी दे डाली. दरअसल, कुंजवाल ने जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह पर निशाना साधा था. कुंजवाल का कहना था कि कांग्रेस जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों की नियुक्ति में जातीय समीकरण के साथ-साथ वरिष्ठता का भी ध्यान नहीं रखा गया है.
हालांकि इसके बाद डैमेज कंट्रोल करने के लिए जिलाध्यक्षों का फिर से फेरबदल करके गोविंद सिंह कुंजवाल को मनाया गया. इन सभी प्रकरणों के बाद सियासी गलियारों में यह बात तैरने लगी कि कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.
पार्टी में सुलग रही गुटबाजी का धुआं दिल्ली तक पहुंचा। जिसके बाद आज सोमवार को कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से मिलने प्रदेश प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह पार्टी कार्यालय पहुंचे. जहां एक तरफ उन्होंने पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल को पार्टी का वरिष्ठ नेता बताकर उनका बचाव किया.
वहीं दूसरी तरफ पार्टी में वरिष्ठतम नेताओं की अनदेखी का आरोप लगाने वाले प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट को खरी-खरी सुनाने से भी नहीं चूके. जोत सिंह बिष्ट के लिए उन्होंने कहा कि न तो वे कभी उनसे मिलने पार्टी कार्यालय आये और न ही कभी अपनी समस्या बताई.

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