अनोखा कारनामा, डॉक्टर को बचाने के लिए Corona पीड़ित पर ही दर्ज करा दिया मुकदमा

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्वास्थ्य विभाग (Health Department) का अनोखा कारनामा सामने आया है. दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) व्यक्ति के परिवार पर ही मुकदमा दर्ज करा दिया है, जबकि उस परिवार के लोगों ने पहले ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को व्हाट्सएप (Whatsapp) और फोन के जरिए पॉजिटिव होने के मामले में अवगत कराया था. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने उल्टा पीड़ित के बेटे पर ही तथ्य छुपाने का मामला दर्ज (FIR) कराते हुए अपने डॉक्टर को बचाने की कोशिश की है. जब इस मामले में न्यूज-18 ने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बात करनी चाही तो वह कैमरा देखकर बौखला उठे और सब मनगढ़ंत कहानी है कहकर ऑफिस छोड़कर भागने लगे अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही के लिए जिले के आला अधिकारी क्या कार्रवाई करेंगे.

आपको बता दें की उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में कैंसर पीड़ित कोरोना पॉजिटिव निकलने के मामले में स्वास्थ्य विभाग खुद को बचाने की जुगत में लगा है. यही कारण है कि कैंसर पीड़ित व उसके बेटे के खिलाफ एसीएमओ ने जानकारी छुपाने का मुकदमा दर्ज करा दिया है. जबकि पीड़ित ने बेटे ने साक्ष्य दिये हैं कि उसने 29 अप्रैल डॉक्टर के मोबाइल पर रिपोर्ट भेजी थी. सीएमओ व सीएमएस कार्यालय में सूचना भी दी थी. लेकिन डॉक्टर खुद को बचाने के लिए उन्हें फंसा रहे हैं.

कीमोथेरेपी से किया इंकार

शहर के घंटाघर निवासी कैंसर पीड़ित का बेटा स्वास्थ्य विभाग के जुल्म से परेशान है. बेटे का दावा है कि 21 अप्रैल को वह अपने पिता को नोएडा के प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां कीमोथेरेपी करने से इंकार कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि पहले कोरोना की जांच होगी उसके बाद ही उपचार होगा. लिहाजा वह 23 अप्रैल को जिला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने सैम्पल ले लिया और घर भेज दिया. 27 अप्रैल को जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी. उस रिपोर्ट को लेकर वह 28 अप्रैल को नोएडा के प्राइवेट अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने उपचार करने से इंकार कर दिया. जिला अस्पताल की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया. लिहाजा नोएडा के डॉक्टरों ने अपने अस्पताल में ही कोरोना की जांच कराई और घर वापस भेज दिया.

Whatsapp पर भेजी रिपोर्ट

29 अप्रैल को अस्पताल के ईमेल से कोविड-19 (Covid-19) की रिपोर्ट आई और अस्पताल की लैब से फोन करके जानकारी दी तो उनके पिता पॉजिटिव है. कैंसर पीड़ित के बेटे का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने डॉ. पवन कुमार को फोन किया तो उन्होंने कहा कि वह अपने पिता को सीमेक्स स्कूल लेकर आयें. उन्होंने डॉक्टर के मोबाइल नंबर पर चल रहे व्हाट्एसएप (Whatsapp) पर नोएडा की रिपोर्ट को भी भेजा. दोपहर के 3:34 मिनट पर डॉक्टर ने रिपोर्ट को व्हाट्सएप (Whatsapp) पर देख भी कर लिया, उसके बाद वह अपने पिता को सीमेक्स स्कूल लेकर पहुंचे. वहां डॉक्टरों ने सेम्पल लिया और वापस घर जाने की कह दी.

जेएन मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट पॉजिटिव

उन्होंने बताया कि एक मई को जेएन मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. इसलिए उन्होंने कहीं कोई जानकारी नहीं छिपाई है. सीएमओ ने अपने डॉक्टर को बचाने के लिए और अपनी कमी छिपाने के लिए उनके और उनके पीड़ित पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है. जब इस मामले में हाथरस के मुख्य चिकित्सा अधिकारी बृजेश राठौर से बात करनी चाहिए तो वह मीडिया का कैमरा देखते ही बौखला उठे और अपनी कार्यवाही को सही ठहराते हुए बोले सब मनगढ़ंत कहानी है और ऑफिस छोड़ कर भागने लगे. इससे पूर्व जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी से फोन पर वार्ता की गई तो वह 12:30 बजे अपनी ड्यूटी छोड़कर कटिंग और शेविंग कराने में व्यस्त थे.

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