एनएच-125 में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे में फँसा पेच

एनएच-74 के बाद एनएच-125 में भी अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे के भुगतान में अर्द्धनगरीय का पेच फंसा हुआ है। दो वर्ष से अर्द्धनगरीय में उलझी एनएचएआई सितारगंज क्षेत्र के पडरी में चार खसरों का चार करोड़ का मुआवजा रिलीज नहीं कर सका है। मुआवजा पाने के लिए काश्तकार एसएलओ दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। इधर, एनएच-125 में ही कुछ संदिग्ध मामलों की वजह से एनएचएआई ने करीब 400 काश्तकारों को मिलने वाला सौ करोड़ का मुआवजा भी रिलीज नहीं किया है।

दरअसल भूमि अधिग्रहण पुनर्वास अधिनियम को वर्ष 2015 में संशोधित किया गया था। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे की दर चार गुना और शहरी क्षेत्र में दोगुना कर दी गई थी। एनएच-74 की तरह ही एनएच-125 में चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई जमीनों के कुछ मामलों में स्टांप ड्यूटी में अर्द्धनगरीय शब्द अंकित था, लेकिन एसएलओ दफ्तर से अर्द्धनगरीय को ग्रामीण क्षेत्र में मानकर अवार्ड बनाकर एनएचएआई को भेजे गए थे।

बताया जा रहा है कि एनएचएआई अर्द्धनगरीय शब्द में उलझा हुआ है। वह इसे शहरी क्षेत्र में मान रहा है, जबकि भौगोलिक परिस्थितियों और दस्तावेजों के अनुसार ये जगहें ग्राम पंचायत का हिस्सा हैं। एनएच-125 के तहत पडरी के चार खसरों का चार करोड़ का मुआवजा दो वर्ष से लटका हुआ है।

एनएचएआई न तो अर्द्धनगरीय की उलझन से बाहर निकल सका है और ना ही एसएलओ दफ्तर से भेजे गए अवार्ड के आधार पर मुआवजे की राशि रिलीज कर रहा है। इसके अलावा, एसएलओ दफ्तर से पूर्व में भेजे गए अवार्ड में कुछ संदिग्ध मामले होने पर एनएचएआई ने सभी अवार्ड का मुआवजा रोका हुआ है।

सितारगंज के पडरी में चार खसरों में मुआवजा दो वर्ष से एनएचएआई से रिलीज नहीं हो सका है। एनएचएआई से मुआवजा रिलीज होते ही काश्तकारों को भुगतान कर दिया जाएगा। करीब चार सौ लोगों को मिलने वाला सौ करोड़ का मुआवजा भी काफी समय से रिलीज नहीं हो सका है।- एनएस नबियाल, एसएलओ। 

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