टिहरी झील में डूबीं करोड़ों की पर्यटन विकास योजनाएं

टिहरी झील को पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अलग पहचान दिलाने के लिए झील में करीब 49.50 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया लेकिन आज तक इनका संचालल नहीं हो पाने से करोड़ों रुपये पानी में बह रहे हैं. स्थानीय बेरोज़गार युवाओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए इन योजनाओं में स्थानीय बेरोज़गार युवाओं की भागीदारी की मांग की है.

पोषित योजनाओं के तहत पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने टिहरी झील में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी साहसिक खेल अकादमी, फ्लोटिंग हट्स, फ्लोटिंग मरीना, बार्ज और होटल के नाम पर योजनाएं शुरू करने का ऐलान किया था. टिहरी झील में 28 नवंबर 2015 को पूर्व सीएम हरीश रावत और केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा और सूबे के पूर्व पर्यटन मंत्री नेहट्स, साहसिक खेल अकादमी, मरीना, बार्ज और होटल का शुभारंभ किया था लेकिन 3 बार टेंडर होने के बावजूद इन योजनाओं का संचालन नहीं हो पाया.

टिहरी झील में बोट चलाने वाले स्थानीय निवासी कुलदीप पंवार कहते हैं कि दरअसल सरकार को ही साफ़ नहीं है कि वह चाहती क्या है. पहले सबका टेंडर एक साथ किया गया, फिर अलग-अलग किया गया लेकिन कोई इन्हें चलाने को तैयार नहीं हुआ. पंवार कहते हैं कि इन्हें स्थानीय लोगों को ही चलाने का मौका देना चाहिए क्योंकि वह टिहरी को, झील को जानते, समझते हैं.

जगदीप भी इस बात से समर्थन जताते हैं और कहते हैं कि टिहरी के उनके समेत कई युवाओं ने पर्यटन से जुड़े कोर्स किए हैं. वह कहते हैं कि वह लोग महानगरों में नौकरी छोड़कर आए थे कि पर्यटन से जुड़ा कोई व्यवसाय करेंगे लेकिन सरकार की नीतियों में अस्पष्टता की कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है.

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