गले की फांस बना संयुक्त सचिव की सीधी नियुक्ति का मामला

नैनीताल : भारत सरकार में संयुक्त सचिवों की सीधी भर्ती से नियुक्ति का मामला गले की फांस बन गया है। इस मामले को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त है। अब तक भारत सरकार यह साफ नहीं कर सकी है कि ऑल इंडिया सर्विसेज को दरकिनार कर यह निर्णय क्यों व किन परिस्थितियों में लिया गया है। सरकार को यह जवाब दाखिल करना है।

चर्चित आइएफएस संजीव चतुर्वेदी ने फरवरी 2020 में भारत सरकार में संयुक्त सचिव के पदों पर हुई सीधी भर्ती में अनियमितता का आरोप लगाते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। कोरोना लॉकडाउन की वजह से  अगस्त 2020 में याचिका पर कैट की नैनीताल सर्किट बेंच पर सुनवाई हुई। अक्टूबर में भारत सरकार की ओर से कैट में अर्जी दाखिल कर केस को दिल्ली बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की तो दिसंबर में कैट ने फैसला भारत सरकार के पक्ष में देते हुए मामले को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया।

संजीव ने इस केस के स्थानांतरण आदेश को नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की तो कोर्ट ने कैट चेयरमैन को नोटिस जारी किया था। पिछले दिनों कैट चेयरमैन एल नरसिम्हन रेड्डी ने  खुद को मामले से अलग करते हुए केस दूसरी बैंच में रेफर कर दिया था।

इधर, नैनीताल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद अगली तिथि 23 मार्च नियत कर दी। यह मामला अब भारत सरकार के लिए गले की फांस बन गया है।

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