SC की फटकार के बाद उत्तराखंड में कूड़ा प्रबंधन नीति तैयार

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार ने उत्तराखंड में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। यह सुप्रीम कोर्ट को भेज भी दिया गया है। मसौदे में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पर फोकस किया गया है। सभी निकायों में जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रस्ताव है। जिन निकायों में कचरा निस्तारण के मद्देनजर ट्रेचिंग ग्राउंड नहीं हैं, वहां के जिलाधिकारियों से इसके लिए जल्द से जल्द भूमि मुहैया कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसे निकायों की संख्या 31 है।

वर्ष 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत दो साल बाद भी उत्तराखंड समेत कुछ अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कोई नीति न बनाए जाने पर हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों को कड़ी फटकार लगाई थी। साथ ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की नीति तैयार होने तक वहां निर्माण कार्याें पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद उत्तराखंड में भी हलचल हुई और नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया।

मसौदे के अनुसार राज्य के सभी 92 नगर निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा। इसके लिए सभी निकाय अपने-अपने स्तर से व्यवस्था करेंगे। जैविक व अजैविक कचरे को अलग-अलग कर इसका निस्तारण किया जाएगा। जैविक कचरे से जैविक खाद बनाई जाएगी, जबकि अजैविक कचरे के निस्तारण को संबंधित संयंत्रों में भेजा जाएगा।

31 निकायों में खड़ी भूमि की चुनौती

प्रदेश के 92 नगर निकायों में कूड़ा-कचरा निस्तारण के मद्देनजर ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए केवल 42 निकायों के पास ही भूमि उपलब्ध है। 19 निकायों में वर्तमान में क्लस्टर आधार पर कूड़ा निस्तारण किया जा रहा है। शेष 31 निकायों में ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए भूमि ही नहीं है। सचिव शहरी विकास के अनुसार इन निकायों में भूमि की उपलब्धता के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। उनसे कहा गया है कि वे जल्द से जल्द भूमि फाइनल कर प्रस्ताव भेजें। इसके बाद इन निकायों में भी ट्रेंचिंग ग्राउंड तैयार कर लिए जाएंगे।

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