चुनाव आयोग के भेदभाव से छिना शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह

अगर चुनाव आयोग तटस्थ होता तो शिवसेना का नाम और उसका चुनाव चिन्ह छीना नहीं जाता. देश की सभी संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं. हम जो कहते रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर मुहर लगाई है. आज (गुरुवार, 24 नवंबर) मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने यह बयान दिया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से यह सवाल किया है कि आखिर क्यों कोई निर्वाचन आयुक्त अपने टर्म पूरे नहीं कर पा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति की पारदर्शिता का जो सवाल उठाया है, वो सही उठाया है.

संजय राउत ने कहा कि शिवसेना अकेली मजबूत पार्टी थी जिसने टी एन शेषण के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी का जोरदार समर्थन किया था. बालासाहेब ठाकरे ने ऐलान किया था कि देश को ऐसे ही मुख्य चुनाव आयुक्त की जरूरत है जो बिना किसी दबाव के संविधान की रक्षा करने में निष्पक्ष रूप से काम करने का सामर्थ्य रखता है. अगर चुनाव आयोग भी दबाव में काम करेगा तो लोकतंत्र का भविष्य सुरक्षित कैसे रह सकेगा. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने आज टी.एन.शेषण को याद किया है.

नियुक्ति के तरीके में सुधार की जरूरत, EC दबाव में है, यह हकीकत

सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के कामकाज की पारदर्शिता के संबंध में याचिका पर सुनवाई करते हुए देश की स्थिति पर चिंता जताई है और ऐसे में टी.एन शेषन को याद करते हुए कहा है कि वे अकेले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त थे जिन्हें किसी दबाव से कुचला नहीं जा सका. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रियाओं पर संसद में सुधार किया जाए, ताकि चुनाव आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र रह सके.

EC तभी रह सकेगा निष्पक्ष, जब इसके सदस्यों का चुनाव हो निष्पक्ष

पांच जजों की खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही है. इनमें न्या. अजय रस्तोगी, न्या. अनिरुद्ध बोस, न्या. ऋषिकेश रॉय और न्या. सीटी रविकुमार शामिल हैं. एससी ने कहा कि हम संसद के कामों में दखल नहीं दे रहे और ना ही देंगे. लेकिन चुनाव आयोग के सदस्यों कि नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है. क्योंकि इसका असर चुनाव आयोग के कामकाज पर दिखाई दे रहा है.

नियुक्ति प्रक्रिया में होंगे ये सुधार, तभी रह पाएगी निष्पक्षता बरकरार

चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र कालेजिमय बनाने की सलाह दी गई है और उसमें मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की बात कही गई है. वर्तमान में चुनाव आयोग के आयुक्त की नियुक्ति मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति करता है. संविधान के अनुच्छेद 324(2) में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून बनाने का निर्देश दिया गया है.

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