आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज पर SC ने अपना फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार (Monday) को  आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) हाई कोर्ट के पूर्व जज वी. ईश्वरैया द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस ईश्वरैया  पर मौजूदा सुप्रीम कोर्ट जज के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट जज के साथ मिलकर साजिश करने का आरोप है जिसका खुलासा दोनों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के जरिए हुआ।

जज ईश्वरैया ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है जिसमें कथित तौर पर उनकी और आंध्र प्रदेश के एक निलंबित ट्रायल कोर्ट मजिस्ट्रेट के बीच एक कथित निजी फोन पर बातचीत करने की जांच के आदेश दिए गए थे। इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज वी. ईश्‍वरैया ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वर्तमान जज के रिश्तेदार अमरावती भूमि घोटाले के बेनामी सौदे में शामिल हैं। उन्‍होंने सफाई दी कि वह इस बारे में और सबूत जुटाने की कोशिश कर रहे थे। जज ईश्‍वरैया ने कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कहा है कि उन्होंने इस बेनामी सौदे के बारे में निलंबित न्यायिक अधिकारी से फोन पर बातचीत में जानकारी मांगी थी।

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जज और निलंबित ट्रायल कोर्ट मजिस्ट्रेट के बीच हुई कथित टेलिफोनिक वार्ता की जांच का निर्देश 13 अगस्त, 2020 को दिया था। जस्टिस ईश्‍वरैया ने इसी आदेश के खिलाफ याचिका दायर कर रखी है। इसी मामले में जस्टिस ईश्‍वरैया ने यह हलफनामा दाखिल किया है। वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल इस हलफनामे में कहा गया है कि पीठासीन जज के आचरण के बारे में सामग्री (अगर उपलब्ध है) मांगने को, जो मेरी जानकारी के अनुसार जांच का विषय है, किसी भी तरह से साजिश नहीं कहा जा सकता।

बता दें कि दिसंबर, 2020 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज वी. ईश्वरैया ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। दरअसल, हाई कोर्ट ने उनके और निलंबित ट्रायल कोर्ट मजिस्ट्रेट के बीच फोन पर हुई बातचीत की जांच का आदेश दिया था। जज ने अपनी याचिका में इसे न्यायपालिका के खिलाफ गंभीर साजिश बताया। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश पर इस आधार पर रोक लगाने की मांग की और कहा कि यह अवांछित और गैरकानूनी है। यह आदेश उन्हें नोटिस जारी किए बिना दिया गया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आरवी रविंद्रन से मामले की जांच करने का आग्रह किया था।

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