जेलों में भीड़ को कम करने के लिए कैदियों को रिहा करें – सुप्रीम कोर्ट

देश में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (8 मई) को संज्ञान लिया। इस दौरान अदालन ने जेलों में भीड़ कम करने के निर्देश दिए। साथ ही, कहा कि जिन कैदियों को पिछले साल महामारी के मद्देनजर जमानत या पैरोल दी गई थी, उन्हें फिर वह सुविधा दी जाए।

चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की एक पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में उच्चाधिकार प्राप्त समितियां बनाई गई थीं। इन समितियों ने पिछले साल मार्च में जिन कैदियों को जमानत की मंजूरी दी थी, उन सभी को समितियों द्वारा पुनर्विचार के बिना दोबारा वह राहत दी जाए। इससे कोरोना फैलने से रोका जा सकेगा।

उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर शनिवार को अपलोड हुए आदेश में कहा गया, ‘हम निर्देश देते हैं कि जिन कैदियों को हमारे पूर्व के आदेशों पर पैरोल दी गई थी, उन्हें भी महामारी पर लगाम लगाने की कोशिश के तहत दोबारा 90 दिनों की अवधि के लिए पैरोल दी जाए।’

शीर्ष अदालत ने एक फैसले का हवाला देते हुए अधिकारियों से कहा कि उन मामलों में गिरफ्तारी से बचें, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष की अवधि की है। पीठ ने उच्चाधिकार प्राप्त समितियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को अपनाते हुए नए कैदियों की रिहाई पर विचार करें।

 

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