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लॉकडाउन से प्राइवेट हॉस्पिटल्स भारी संकट में, सरकार से की राहत की मांग

नई दिल्ली. कोविड-19 महामारी (Pandemic) ने देश के प्राइवेट हेल्थकेयर सेक्टर (Private Healthcare Sector) को बड़े संकट के दौर में धकेल दिया है. लॉकडाउन की वजह से इस सेक्टर को भारी नुकसान से गुजरना पड़ रहा है. FICCI-EY की एक स्टडी में यह बात कही गई है.

10 दिन में 70 फीसदी घटा रेवेन्यू
इस स्टडी में कहा गया, ‘महामारी ने प्राइवेट हेल्थेकयर को बुरी तरह से प्रभावित किया है. मार्च महीने के अंतिम 10 दिन में टेस्ट वॉल्युम और फुटफॉल में 70-80 फीसदी की कमी आई है. इस दौरान इस सेक्टर का रेवेन्यू भी 70 फीसदी तक गिर चुका है. लॉकडाउन जारी रहने की वजह से अब अप्रैल महीने में भी स्थिति कुछ ऐसी ही रहने वाली है.’

टैक्स से लेकर ​सब्सिडी तक का लाभ मिले
स्टडी में कहा गया कि लॉकडाउन के बाद इस सेक्टर को संभलने में कम से कम 3 तिमाही लग जाएंगे. कहा गया, ‘चालू वित्त वर्ष में एक अनुमान के मुताबिक करीब 14,000-24,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. इस सेक्टर को​ लिक्विडिटी इन्फ्युजन, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बेनिफिट के साथ​ फिक्स्ड कॉस्ट सब्सिडी की जरूरत होगी.’

छोटे शहरों में नर्सिंग होम बंद
फिक्की हेल्थ सर्विस कमिटी चेयर आलोक राय के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से बड़े स्तर पर टियर 2 और टियर 3 शहरों में छोटे नर्सिंग होम्स ठप पड़े हैं. यही कारण है कि इस सेक्टर में वित्तीय संकट देखने को मिल रहा है. कई ऐसे ​नर्सिंग होम खुले हैं लेकिन कैश फ्लो कम होने की वजह से बंद होने के कगार पर हैं. लोग नर्सिंग होम तक नहीं पहुंच रहे हैं.

EY इंडिया के हेल्थकेयर पार्टनर Kaivaan Movdawalla ने कहा, ‘एक तरफ नेशनल ड्यूटी को देखते हुए प्राइवेट सेक्टर सरकार के साथ प्रतिबद्ध तरीके से खड़ा है. लेकिन दूसरी तरफ वो खुद संकट की स्थिति में फंस चुका है.’

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