उत्तराखंड में आइसीयू और आइसोलेशन बेड की संख्या बढ़ाने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में कोरोना का प्रकोप भले ही अभी थमा हो, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। कोरोना के उपचार के लिए अधिकृत अस्पतालों में जहां आइसोलेशन बेड बढ़ाए जा रहे हैं, वहीं आइसीयू की भी क्षमता बढ़ेगी। जिसका प्लान भी तैयार है।

देहरादून में ही वर्तमान समय में पांच अस्पतालों में 1400 बेड कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए आरक्षित हैं। जबकि वेंटिलेटर सहित 74 आइसीयू बेड की व्यवस्था है। जिससे अगले एक माह के भीतर और बढ़ा दिया जाएगा। तकरीबन दो हजार आइसोलेशन बेड व 215 आइसीयू बेड केवल कोरोना के मरीजों के लिए आरक्षित होंगे।

देश में जिस तरह से कोरोना के मरीज बढ़े हैं, चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार विस्तार देने में जुटी है। पिछले दो दिन में जहां 477 नए चिकित्सकों की नियुक्ति सरकार ने की है। फोकस इस बात पर है कि इलाज में किसी तरह की कोई कमी न रहे।

दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के अलावा निजी अस्पतालों में भी बेड आरक्षित किए गए हैं। संसाधन भी बढ़ाए जा रहे हैं। अप्रैल अंत तक आइसीयू बेड करीब तीन गुना बढ़ जाएंगे। आइसोलेशन बेड में भी बढ़ोत्तरी की जा रही है।

निजी अस्पतालों को मिलेगी सुरक्षा किट

कोरोना के उपचार के लिए आरक्षित निजी अस्पतालों को अब राज्य सरकार ही एन-95 मास्क और पीपीई किट मुहैया कराएगी। दरअसल अस्पतालों को अपने स्तर पर खरीद में दिक्कत हो रही है। बताया गया कि सरकार ये सामान एकसाथ खरीदेगी। जिसका अस्पताल भुगतान करेंगे। अटल आयुष्मान में शामिल अस्पताल के क्लेम से भी इस रकम की कटौती का विकल्प रखा गया है।

बता दें, प्रदेश में अभी तक कोरोना के सात मामले सामने आ चुके हैं। साथ ही संदिग्ध मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राज्य सरकार ने दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल को कोरोना के उपचार के लिए आरक्षित रखा है। इसके अलावा एम्स ऋषिकेश, हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट, श्री महंत इंदिरेश अस्पताल व सैन्य अस्पताल में भी उपचार की व्यवस्था है।

अभी तीन दिन पहले अस्पताल के प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ बैठक हुई थी। जिसमें आगे की तैयारियों पर विमर्श किया गया। निजी अस्पतालों का कहना था कि उन्हें एन-95 मास्क, पीपीई किट आदि खरीदने में दिक्कत पेश आ रही है। यह सामान आसानी से उपलब्ध भी नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने भी यह मुद्दा उठाया। ऐसे में यह तय किया गया है कि राज्य सरकार ही एकसाथ सामान खरीदेगी। एचएलएल लाइफकेयर को सामान का ऑर्डर दिया भी जा चुका है। सरकार के स्तर से ही सामान अस्पतालों को मुहैया कराया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति अस्पतालों से की जाएगी। वे सीधा इसका भुगतान करेंगे या फिर पैसा अटल आयुष्मान के क्लेम की राशि से काट लिया जाएगा।

 

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