फारुक अब्दुल्ला करेंगे लोक सभा चुनावो का बहिष्कार

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। फारुक अब्दुल्ला ने सख्त लहजे में कहा कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370 पर अपना रुख साफ करे नहीं तो उनकी पार्टी पंचायत और विधानसभा चुनाव ही नहीं बल्कि लोकसभा चुनावों का भी बहिष्कार करेगी।

फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन को धारा 35ए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका पर जोरदार तरीके से पैरवी करनी चाहिए। इससे पहले भी अब्दुल्ला ने पांच सितंबर को कहा था कि जब तक केंद्र सरकार इस पर अपने रुख को साफ नहीं करती है और राज्य में शांति की कोशिशों को आगे नहीं बढ़ाती तब तक हम इन चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे।

हांलाकि फारूक अब्दुल्ला को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती का साथ मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। महबूबा मुफ्ती भी अनुच्छेद 35ए का हवाला देते हुए पंचायत चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला कर चुकी हैं।

छह सितंबर को पीडीपी के कोर ग्रुप की बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता रफी मीर ने भी कहा था कि पीडीपी पंचायत चुनावों से दूर रहेगी। मौजूदा हालात चुनावों के लिए उपयुक्त नहीं है और जब तक केंद्र सरकार अनुच्छेद 35ए पर अपना रुख स्पष्ट नहीं करती, पीडीपी इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेगी।

गौरतलब है कि 35ए के मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि राज्य में अभी पंचायत चुनाव होने हैं इसलिए सुनवाई आगे बढ़ाई जाए। 35A के मुद्दे पर राज्य में लगातार विरोध हो रहा है, जिस समय सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे की सुनवाई हो रही थी तब भी कई बार राज्य में बंद बुलाया गया था।

हालांकि, पंचायत चुनावों को लेकर अभी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन अक्टूबर-नवंबर में मतदान होने की संभावना है। गौरतलब है कि राज्य में फिलहाल राज्यपाल शासन चल रहा है।

अनुच्छेद 35ए के बारे में जानिए 

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर को राज्य के रूप में विशेष अधिकार देता है। इसके तहत दिए गए अधिकार ‘स्थाई निवासियों’ से जुड़े हुए हैं। इसका मतलब है कि राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दें अथवा नहीं दें।

अनुच्छेद 35ए को लेकर 14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था, इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35ए जोड़ दिया गया। अनुच्छेद 35ए, धारा 370 का ही हिस्सा है। इस धारा के कारण दूसरे राज्यों का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है।

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