Missionaries of Charity in the sale and purchase of children in Jharkhand

झारखंड में बच्चों की खरीद-फरोख्‍त में मिशनरीज ऑफ चैरिटी

रांची स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय से बेचे गये चौथे बच्चे को भी पुलिस ने रविवार को पलामू से बरामद कर लिया. जानकारी के मुताबिक 6 माह के इस बच्चे की छतरपुर थानाक्षेत्र के मझिनावां गांव से बरामदगी हुई. हालांकि जिस दंपति को ये बच्चा बेचा गया था, वह रांची के कांटाटोली इलाके में ही रहता है. लेकिन इस मामले के उजागर होने के बाद वह पलामू स्थित अपने गांव भाग गया था.

पुलिस के मुताबिक इस बच्चे को भी पचास हजार रुपये में बेचा गया. फिलहाल उसे रांची के बरियातू स्थित करुणाश्रम में रखा गया है. उधर इस मामले में निर्मल हृदय की आरोपी सिस्टर कौंसीलिया व स्टाफ अनिमा इंदवार से पुलिस की पूछताछ जारी है. दोनों को पुलिस ने चार दिन की रिमांड पर लिया है. इससे पहले तीन बेचे गये बच्चों को पुलिस ने रांची के विभिन्न इलाकों से बरामद किया था. उनमें से एक को मां को लौट दिया गया, क्योंकि उस बच्ची की बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की कस्टडी में स्थिति खराब हो गई थी.

फिलहाल निर्मल हृदय से बच्चा बेचे जाने के इस मामले की जांच बाल कल्याण समिति और समाज कल्याण पदाधिकारी कर रहे हैं. इस सिलसिले में रांची के कोतवाली थाने में केस दर्ज हुआ है. इसके आधार पर पुलिस ने पूछताछ के बाद सिस्टर कौंसीलिया व स्टाफ अनिमा इंदवार को गिरफ्तार किया गया था. गौरतलब है कि यूपी के दंपति की शिकायत पर सीडब्ल्यूसी की जांच के बाद बच्चा बेचने का यह मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक जिन चार बच्चों को बेचा गया था, उन सभी को बरामद कर लिया गया.

गौरतलब है कि मदर टेरेसा की मिशनरी ऑफ चैरिटीज की गिरफ्तार सिस्टर कंसोलिया ने कबूल कर लिया था कि उसने चैरिटी के बालाश्रय से तीन बच्चों को पैसे लेकर बेच दिया था. उसने बताया कि एक बच्चे को बिना पैसे लिए ही किसी को दे दिया. इसकी जानकारी रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता ने दी थी. सिस्‍टर ने पैसे लेकर तीन बच्चों को अलग-अलग खरीददारों को बेचा था, जिनकी पुलिस पहले ही बरामदगी कर चुकी है.

हालांकि इंडियन बिशप्स कांफ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहास ने दावा किया था कि मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े हाल में उजागर हुए रैकेट में बिल्कुल भी शामिल नहीं है और यदि कोई एक सिस्टर इस मामले में दोषी भी है तो उसकी गलती के लिए पूरी मिशनरी को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए. बिशप मैस्करेनहास ने कहा था, ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटीज बच्चों के बेचने के मामले में बिलकुल भी शामिल नहीं है. वैसे तो इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर कंसीलिया ने भी अपने वकील को बताया था कि वह बच्चों को बेचने में कहीं से भी शामिल नहीं है. उससे पुलिस ने दबाव में यह बयान लिया है कि उसने बच्चों को बेचा था.’

लेकिन बिशप के दावों का खंडन करते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता ने पहले ही कहा था कि इंडियन बिशप्स कांफ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहास का बयान पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है.

 

 

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