GST से हुआ उत्तराखंड के राजस्व में भारी घाटा

देहरादून : जीएसटी लागू होने के बाद से उत्तराखंड के राजस्व में गिरावट निरंतर जारी है। पिछले साल जुलाई से इस जुलाई तक प्रदेश में किए गए कारोबार से जो राजस्व प्राप्त हुआ है, उसका महज 22.28 फीसद हिस्सा ही राज्य के खाते में गया है।

इस बात से चिंतित राज्य माल और सेवा कर विभाग ने कर चोरी के सभी रास्ते बंद करने का निर्णय लिया है। तय किया गया है कि 50 हजार रुपये से कम के जिस माल पर ई-वे बिल बनाने की अनिवार्यता नहीं है, उनकी गहन जांच की जाएगी।

इसके लिए आयुक्त राज्य कर सौजन्या ने सचलदल इकाइयों को प्रदेश में आने वाले माल के बिलों पर समय, तिथि का उल्लेख करने के साथ ही हस्ताक्षर करने के भी आदेश दिए हैं। आयुक्त राज्य कर सौजन्या का कहना है कि बिलों पर हस्ताक्षर होने से उनका दोबारा प्रयोग संभव नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही बिलों व ट्रांसपोर्टरों की बिल्टी की छायाप्रति भी ली जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी जांच की जा सके। वहीं, संवेदनशील वस्तुओं के मामले में बिल पर अंकित विक्रेता कारोबारी के विवरण, जीएसटीआइएन, फोन नंबर आदि की पुष्टि विभिन्न स्रोत से रेंडमली की जाएगी।

यह भी देखा जाएगा कि अन्य राज्यों से माल मंगाए जाने पर उस पर आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) चार्ज किया गया है या नहीं। जो बिल राज्य के पंजीकृत कारोबारियों से संबंधित हैं, राज्य कर अधिकारी ऐसे बिलों में ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) को भेजेंगे। यहां से इन बिलों को छांटकर कार्यालयवार कर निर्धारण अधिकारियों को भेजा जाएगा। कर निर्धारण अधिकारी ऐसे बिलों का सत्यापन करेंगे। कोई भी खामी पाए जाने पर इसकी सूचना ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) के माध्यम से ज्वाइंट कमिश्नर (एसटीएम/टैक्स रिव्यू) को भेजी जाएगी।

ताकि संबंधित ट्रांसपोर्टरों पर भी आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अपंजीकृत कारोबारियों पर भी नजर तय किया गया है कि यदि राज्य में आने वाला माल अपंजीकृत कारोबारी के माध्यम से भेजा जा रहा है और प्राप्तकर्ता कारोबारी की जानकारी भी स्पष्ट नहीं है, उस पर आइजीएसटी का उल्लेख नहीं है या कैश अंकित है तो इन मामलों में विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

कारोबार की सीमा की भी जांच जो बिल राज्य के अपंजीकृत कारोबारियों के हैं, उन्हें सचलदल इकाई साप्ताहिक रूप से एसटीएफ (विशेष कार्यबल इकाई) को भेजेगी। यहां से बिलों को कर निर्धारण अधिकारियों के माध्यम से सत्यापित कराकर यह भी देखा जाएगा कि कहीं बिल फर्जी तो नहीं या कारोबारी का कारोबार पंजीकरण की श्रेणी में तो नहीं आता है। दूसरे राज्यों का लिया जाएगा सहयोग आयुक्त राज्य कर ने सभी ज्वाइंट कमिश्नर (एसटीएफ/टैक्स रिव्यू) को निर्देश दिए हैं कि उन राज्यों के अधिकारियों से समन्वय बनाकर रखें, जहां से अधिक मात्रा में उत्तराखंड में माल आ रहा है। ताकि कर चोरी के मामले में जरूरत पड़ने पर उनका भी सहयोग लिया जा सके।

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