देश का अंतिम डाकघर हर्षिल बनेगा अब धरोहर

पर्यटन दिवस पर उत्तरकाशी से अच्छी खबर है. हर्षिल में भारत-तिब्बत अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के अंतिम डाकघर को अब प्रदेश सरकार धरोहर के रूप में विकसित करेगी. विश्व विख्यात पर्यटन स्थल हर्षिल में मुखबा, हर्षिल व बगोरी गांव के लोगों का ऐतिहासिक डाकघर है जिसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता है. अब सरकार के फ़ैसले के बाद ज़िला प्रशासन ने भी डाकघर की हालत सुधारने के लिए 5 लाख रुपये की धनराशि जारी करने का फ़ैसला किया है.

उत्तरकाशी की हर्षिल घाटी खूबसूरती के लिए जानी जाती है. 80 के दशक में राजकपूर निर्देशित फ़िल्म ‘फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली’ के बहुत से सीन डाकघर और उसके आस पास फिल्माए गए हैं. फ़िल्म के हिट होने से इस अंतिम डाकघर को पहचान मिली और ये लोगों के आकर्षण का केंद्र बना. हर्षिल आने वाले पर्यटक सबसे पहले इस डाकघर के बारे में पूछते हैं और यहां फोटो शूट कर अपने टूर को यादगार बनाते हैं.

स्थानीय लोग सालों से हर्षिल डाकघर के जीर्णोद्धार की मां कर रहे थे. इसका संज्ञान लेते हुए पर्यटन विभाग और ज़िला प्रशासन ने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा. अब प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. ज़िला प्रशासन को इसे धरोहर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं.

डाकघर के विकास के लिए प्रथम चरण में 5 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं. पर्यटन विभाग भवन स्वामी से संपर्क कर रहा है, जो अब गांव में नहीं रहते ताकि डाकघर के जीर्णोद्धार के लिए अनुमति ली जा सके.

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