कैंसर के इलाज में रामबाण है पहाड़ी जंगली फल तिमला

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला मामूली फल तिमला बड़े काम का निकला है। जिस तिमला की फलों में कहीं भी प्रमुखता से गिनती नहीं की जाती, उसके भीतर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम के गुण मौजूद हैं। वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआइ) की केमेस्ट्री डिविजन के शोध में पता चला कि तिमला के तेल में चार ऐसे फैटी एसिड हैं, जिनसे कैंसर समेत अन्य बीमारियों का इलाज संभव है। इस शोध का प्रस्तुतीकरण दून में चल रहे 19वें राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन में किया गया।

केमेस्ट्री डिविजन के वरिष्ठ विज्ञानी वाईसी त्रिपाठी के मुताबिक वनस्पति विज्ञान में तिमला को ‘फिकस ऑरिकुलाटा’ नाम से जाना जाता है। पारंपरिक रूप से से तिमला का नाम औषधीय गुणों के लिए लिया जाता रहा है, लेकिन अब तक यह पता नहीं था कि इस फल में कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं। इसी जानकारी के लिए विभिन्न स्थानों से फलों के सैंपल लिए गए और इनका तेल निकाला गया। जांच में चौंकाने वाली बात पता चली कि तमाम औषधीय निर्माता कंपनी जिन तत्वों की मदद से कैंसर, हृदय रोग, कोलेस्ट्रोल का स्तर कम करने के लिए दवा बनाती हैं, वह सभी इसमें मौजूद हैं।

वरिष्ठ वैज्ञानिक त्रिपाठी के मुताबिक राष्ट्रमंडल वानिकी सम्मेलन में इस शोध के रखे जाने के बाद देश-विदेश की दवा निर्माता कंपनियों का ध्यान तिमला की तरफ जाएगा। यदि तिमला के तेल से दवाओं का निर्माण किया जाएगा तो बहुत संभव है कि गंभीर रोगों की दवाओं की कीमत भी कम होगी, क्योंकि कच्चे माल के रूप में तिमला पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

औषधीय रूप में प्रयोग होता है तिमला
चीन में तिमले की ही एक प्रजाति फाईकस करीका औद्योगिक रूप से उगायी जाती है तथा इसका फल बाजार में पिह के नाम से बेचा जाता है। पारम्परिक रूप से चीन में हजारों वर्षों से तिमले का औषधीय रूप में प्रयोग किया जाता है। FAOSTAT, 2013 के अनुसार विश्व भर में 1.1 मिलियन टन तिमले का उत्पादन पाया गया, जिसमें सर्वाधिक टर्की 0.3, इजिप्ट 0.15, अल्जीरिया 0.12, मोरेक्को 0.1 तथा ईरान 0.08 मिलियन टन उत्पादन पाया गया।

तिमला में पाए गए फैटी एसिड

-वैसीसिनिक एसिड (इसमें कैंसररोधी क्षमता मौजूद होती है)

-ए(अल्पा) लाइनोलेनिक एसिड (दिल की विभिन्न बीमारियों के इलाज में कारगर)

-लाइनोलेनिक एसिड (दिल की धमनियों के ब्लॉकेज हटाने में सहायक)

-ऑलिक एसिड (लो-डेंसिटी लाइपोप्रोटीन की मात्रा शरीर में कम करता है, इस प्रोटीन से कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ता है)

1.76 फीसद मिलता है तेल

इस अध्ययन में बतौर शोधार्थी शामिल रहीं निशात अंजुम ने बताया कि प्रयोगशाला जांच में तिमला के फल में 1.76 फीसद तेल पाया गया। यह मात्रा दवा निर्माण के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा फल को भी खाने पर बीमारियों से बचाव संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शोध के बाद इस फल को बढ़ावा मिलेगा और आसानी से सुलभ होने पर लोग प्राकृतिक रूप से भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

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