कर्ज तले दबी सरकार, कैसे उठाएगी Y श्रेणी सुरक्षा का भार?

राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर की गई समीक्षा बैठक में अनेक व्यक्तियों के नाम काटे गए और मात्र 16 व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह ऐसा है जिनकी सुरक्षा की समीक्षा की गई है।

  1. महामहिम राज्यपाल
  2. मुख्यमंत्री
  3. समस्त पूर्व मुख्यमंत्री गण
  4. मुख्य न्यायाधीश
  5. न्यायधीशगण
  6. बाबा रामदेव
  7. धर्मवीर शर्मा, रिटायर्ड जज
  8. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद
  9. योगी आदित्यनाथ के माता-पिता
  10. शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती
  11. शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम
  12. भोले जी महाराज
  13. मंगला माता
  14. राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी
  15. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट
  16. रामानंद हंस देवाचार्य

जबकि पूर्व की भांति ही मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश गण को Z+ सुरक्षा दी गयी है। वहीं धर्मवीर शर्मा, रिटायर्ड जज, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद को Z दी गयी है। इनमें से कुछ लोगों को ये सुरक्षा और एस्कॉर्ट सिर्फ राज्य प्रवास पर ही दी जाएगी।

अब सवाल ये है कि क्या हकीकत में शांति और अहिंसा की बात करने वाले संतों और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को इस सुरक्षा की जरूरत है। इस मामले में गृह विभाग के सचिव आनंद वर्द्धन कहते हैं कि सुरक्षा देना या ना देना ये सम्बन्धित जिलों की सुरक्षा समीक्षा और उनके अनुसार होता है। जिले को लगता है कि सुरक्षा देने की जरूर है तो उसी अनुसार ये सुरक्षा दी जाती है।

एक नज़र सुरक्षा के मानकों और उनके खर्चे पर

  • जेड प्लस- 36 सुरक्षाकर्मी होते हैं। इसमें 10 कमांडो और सिविल पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। ये सुरक्षा सूबे में राज्यपाल और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को मिली है। इसमें सुरक्षा के दो घेरे होते हैं।
  • जेड- 22 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। राज्य कमांडो के साथ पुलिस के जवान तैनात रहते हैं। साथ ही जेड कैटगरी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति को एक एस्कॉर्ट कार भी मिली होती है।
  • Y श्रेणी- 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इसमें दो पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (पीएसओ) और 9 पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। जिस पर करीब 48 लाख 60 हजार रुपये के महीना का खर्च आता है। इसके साथ ही एस्कॉर्ट का खर्चा और पुलिसकर्मियों के टीए-डीए का खर्चा अलग से शामिल हैं।
  • X श्रेणी- 2 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं, जिनमें एक पीएसओ शामिल होता है।

त्रिवेद्र सरकार ये अतिरिक्त खर्च तब करने जा रही है, जब सूबे पर पहले ही 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इन हालात में जो रुपये प्रदेश के विकास में खर्च हो सकते थे वो अब संतो और नेताओं के सुरक्षा पर खर्च होगा।

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