अब मत्स्यपालन से होगी उत्तराखंड की आर्थिकी मजबूत

देहरादून : 17 साल का वक्फा। 11 विभागीय मत्स्य प्रक्षेत्र, राज्य मत्स्य पालक विकास अभिकरण की हैचरी एक, मत्स्य बीज (अंगुलिका) के उत्पादन को सिर्फ पांच प्रक्षेत्र। प्रतिवर्ष कुल उत्पादन करीब 4200 मीट्रिक टन और इसका मूल्य लगभग 50 करोड़। यह है उत्तराखंड में रोजगार सृजन की दिशा में अपार संभावनाएं वाले क्षेत्र मत्स्यपालन का लेखा-जोखा। आंकड़े खुद बता रहे कि इस क्षेत्र को जितनी तवज्जो मिलनी थी, वह नहीं मिल पाई। लंबे इंतजार के बाद मौजूदा सरकार ने अब मत्स्यपालन को गति देने का निश्चय किया है।

गंगा, यमुना समेत तमाम छोटी-बड़ी नदियों के उद्गम स्थल उत्तराखंड में मत्स्यपालन को बढ़ावा देने की बातें तो अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में भी होती रहीं, मगर गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत नहीं समझी गई। राज्य गठन के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं हुआ। लोगों को मत्स्यपालन से जोड़ने की रफ्तार धीमी ही रही। यह स्थिति तब है, जबकि यहां पाई जाने वाली ट्राउट, महाशीर, सेला जैसी प्रजातियों की खासी डिमांड है। यही नहीं, ग्रामीणों को मत्स्य बीज मुहैया कराने के लिए विभाग पांच प्रक्षेत्रों से आगे नहीं बढ़ पाया। वर्तमान में ऊधमसिंहनगर के चार और चमोली के एक प्रक्षेत्र से ही मत्स्य बीज का व्यावसायिक उत्पादन हो पा रहा है।

यदि सरकारी स्तर के साथ ही निजी क्षेत्र में मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के गंभीरता से प्रयास होते तो आज मछली उत्पादन कई गुना अधिक बढ़ सकता था। हालांकि, यह बात समझने में विभाग को 17 साल का वक्त लग गया। अब जाकर प्रयास शुरू किए गए हैं और इसे किसानों की आय दोगुना करने की कड़ी से जोड़कर कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

नस्ल सुधार को वूडबैंक

मछलियों की अच्छी नस्ल के बीज मत्सयपालकों को उपलब्ध कराने के लिए खटीमा में वूडबैंक तैयार किया जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक यह इस साल के अंत तक अस्तित्व में आ जाएगा।

चार नई मत्स्य प्रक्षेत्र जल्द

मत्स्यपालन विभाग ने गढ़वाल में रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और कुमाऊं में पिथौरागढ़ अथवा बागेश्वर में एक-एक मत्स्य प्रक्षेत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है। बताया गया कि गढ़वाल में भूमि उपलब्ध हो गई है, जबकि कुमाऊं के लिए प्रयास चल रहे हैं।

एंगलिंग को अगले साल 132 बीट

मत्स्य विभाग को राज्य में फिशिंग राइट मिल गए हैं और अब उसने एंगलिंग के लिए लाइसेंस देना प्रारंभ कर दिया है। बताया गया कि इसके लिए 2013 की नियमावली के तहत कार्य प्रारंभ किया गया है। अब तक ट्राउट व महाशीर की एंगलिंग के लिए देहरादून व चमोली में 16 बीटों के लाइसेंस दिए गए हैं और अगले साल 132 बीट खोली जाएंगी।

मत्स्य विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य का कहना है कि राज्य में किसानों की आय को दोगुना करने की कड़ी में मत्स्यपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मत्स्यपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। कोशिश ये है कि मत्स्यपालन को रोजगार के अवसर सृजित करने के बड़े क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए।

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